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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर गुरूचरण विश्वविद्यालय में महिला सम्मेलन आयोजित

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर गुरूचरण विश्वविद्यालय में महिला सम्मेलन आयोजित

शिलचर: के अवसर पर बुधवार को के कॉन्फ्रेंस हॉल में विश्वविद्यालय के किरणशशि वुमेन्स सेल और के संयुक्त तत्वावधान में एक महिला सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का विषय था— “सभी महिलाओं और बालिकाओं के लिए अधिकार, न्याय और प्रभावी कदम।”

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में (डीआईजी, दक्षिण रेंज, असम पुलिस) उपस्थित थीं। अन्य विशिष्ट अतिथियों में अधिवक्ता , इतिहास विभाग की प्राध्यापिका , स्त्री रोग विशेषज्ञ तथा ईस्टर्न क्रॉनिकल की संपादक शामिल थीं। कार्यक्रम की शुरुआत में किरणशशि वुमेन्स सेल की कोषाध्यक्ष ने अतिथियों का स्वागत किया।

सभा की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति ने प्राचीन भारतीय दर्शन के संदर्भ में मानव जीवन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ज्ञान और जागरूकता के माध्यम से ही व्यक्ति भ्रम से सत्य की ओर अग्रसर होता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में महिला विकास से महिला-नेतृत्व वाले विकास की दिशा में महत्वपूर्ण परिवर्तन हो रहा है, जो वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने “जेंडर डिविडेंड” की अवधारणा पर जोर देते हुए देश निर्माण में युवतियों की सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।

डीआईजी जयश्री खेरसा ने महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराने के लिए ऑनलाइन पोर्टल और इलेक्ट्रॉनिक शिकायत बॉक्स की सुविधा उपलब्ध है। साथ ही टोल-फ्री नंबर 112 पर कॉल कर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। उन्होंने बताया कि जल्द ही जीपीएस से लैस पुलिस वाहनों के माध्यम से त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जाएगी तथा महिलाओं के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किए जाएंगे।

कार्यक्रम में ने किरणशशि नाग को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें एक दूरदर्शी शिक्षाविद, समाजसेवी और दानदाता के रूप में याद किया। उन्होंने बताया कि संस्थान की स्थापना के समय उन्होंने 10,000 रुपये का दान दिया था।

प्राध्यापिका सुपर्णा रॉय ने समाज में महिलाओं की बहुआयामी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उनकी शक्ति, धैर्य और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि वैदिक काल से लेकर आज तक अनेक प्रेरणादायक महिला नेतृत्व के उदाहरण मिलते हैं। उनके अनुसार महिलाओं के विरुद्ध अपराध का मुख्य कारण समाज में नैतिक मूल्यों का ह्रास है और वास्तविक सशक्तिकरण आत्मविश्वास, जागरूकता तथा आंतरिक शक्ति से आता है।

अधिवक्ता बिथिका आचार्य ने कहा कि लैंगिक असमानता समाज की प्रगति में बड़ी बाधा है। उन्होंने याद दिलाया कि भारतीय संविधान महिला और पुरुष दोनों को समान अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वुमेन्स सेल, पुलिस और अन्य संस्थाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया तथा सुरक्षित और सम्मानजनक समाज के निर्माण में पुरुषों की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. सुजाता चौधुरी धर ने “Give to Gain” की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए समाज में सकारात्मक योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 8 मार्च को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि महिलाओं की रचनात्मकता, नेतृत्व और परिवर्तन की क्षमता को सम्मान देने का अवसर है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी से पहले राय फैलने के खतरे की ओर भी ध्यान दिलाया और मानसिक तथा शारीरिक स्वास्थ्य को समान महत्व देने की आवश्यकता बताई।

डॉ. मोनिका देव ने समाज में बदलती मानसिकता का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां पहले पुत्र जन्म को अधिक महत्व दिया जाता था, वहीं अब कन्या जन्म का भी उत्साहपूर्वक स्वागत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिवार की वास्तविक शक्ति महिला और पुरुष दोनों के समान योगदान से बनती है।

कार्यक्रम के अंतर्गत एक इंटरैक्टिव सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के शैक्षणिक रजिस्ट्रार उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत बी.कॉम द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा के उद्घाटन नृत्य से हुई। अंत में ने धन्यवाद ज्ञापन किया, जबकि पूरे कार्यक्रम का संचालन ने किया।

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