उधारबंद में आध्यात्मिक माहौल के बीच हुआ नववर्ष 2026 का स्वागत, कल्पतरु उत्सव में उमड़े श्रद्धालु
उधारबंद (नीहार कांति राय)।
वर्ष 2025 को विदा कर पूरे उत्साह और नई उम्मीदों के साथ उधारबंद सहित समूची बराक घाटी में नववर्ष 2026 का स्वागत किया गया। कैलेंडर के पन्नों से 2025 खिसक चुका है और लोगों ने नए साल को नए संकल्प, नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच के साथ अपनाया।
नववर्ष के पहले दिन उधारबंद में शांति और सौहार्द का वातावरण देखने को मिला। सुबह एक सड़क दुर्घटना में एक युवक के घायल होने की घटना को छोड़ दें तो दिन भर कोई अप्रिय घटना नहीं घटी। अन्य वर्षों की तुलना में न तो बड़े पैमाने पर पिकनिक या शोर-शराबा देखने को मिला और न ही तेज संगीत का बोलबाला रहा। इसके विपरीत, पूरे क्षेत्र में एक शांत और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।
नववर्ष के प्रथम दिन श्री श्री कांचा कांति माता मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर परिसर में तिल रखने तक की जगह नहीं थी। श्रद्धालु माता के दर्शन कर नए वर्ष के लिए सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद लेते नजर आए।
उसी दिन श्री ठाकुर रामकृष्ण के पावन कल्पतरु उत्सव का भी आयोजन हुआ। दोपहर बाद उधारबंद के भाटी गांव स्थित श्री रामकृष्ण मंदिर में भक्तों की भीड़ बढ़ने लगी। अपराह्न 3 बजकर 10 मिनट पर कल्पतरु के पावन क्षण में लगभग 500 से अधिक श्रद्धालुओं ने एक साथ जप और ध्यान किया। उस समय मंदिर परिसर में ऐसी निस्तब्धता और आध्यात्मिक शांति व्याप्त थी कि पिन गिरने की आवाज भी सुनी जा सकती थी।
इस अवसर पर श्री रामकृष्ण शारदा सेवा समिति के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ देव ने कल्पतरु के महान उद्देश्य पर प्रकाश डाला, वहीं “तुम्हार चैतन्य होक” के भावार्थ की विस्तृत व्याख्या हरिहर चक्रवर्ती ने की। समिति के नव-नियुक्त अध्यक्ष देबतोष सेन ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का समापन “श्री रामकृष्ण शरणम” भजन के साथ हुआ।
इसके बाद सभी श्रद्धालु शांतिपूर्वक पंक्तिबद्ध होकर ठाकुर का प्रसाद ग्रहण कर अपने-अपने घर लौटे। इस प्रकार उधारबंद में नववर्ष 2026 का पहला दिन पूरी तरह से आध्यात्मिकता, शांति और श्रद्धा के वातावरण में संपन्न हुआ।





















