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करोड़ों का ‘मेकओवर’ पर सुरक्षा ‘ताले’ में: किशनगढ़ का पुराना बस स्टैंड अब भगवान भरोसे
विशाल झा / किशनगढ़ (अजमेर)। मार्बल सिटी किशनगढ़ का हृदय स्थल कहा जाने वाला पुराना बस स्टैंड आज अपनी बदहाली और प्रशासनिक अनदेखी की कहानी खुद बयां कर रहा है। करोड़ों रुपये खर्च कर इस बस स्टैंड का कायाकल्प तो कर दिया गया, लेकिन सुविधाएं और सुरक्षा आज भी यात्रियों की पहुंच से कोसों दूर हैं। यात्रियों की सुरक्षा के लिए बनाया गया पुलिस रूम बंद पड़ा है, तो वहीं स्वच्छता के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है।
करोड़ों की लागत, फिर भी यात्री परेशान
नगर परिषद और स्थानीय प्रशासन द्वारा इस पुराने बस स्टैंड के नवीनीकरण और सौंदर्यीकरण पर करोड़ों रुपये की राशि खर्च की गई थी। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य शहर के मध्य से यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं और सुरक्षित वातावरण देना था।
लोकार्पण का सच: इस बस स्टैंड का नया स्वरूप जनता को समर्पित तो किया गया, लेकिन रखरखाव के अभाव में यह “सफेद हाथी” साबित हो रहा है। (किशनगढ़ में पिछले दो वर्षों में विभिन्न शहरी सुधार परियोजनाओं के तहत इसे नया रूप मिला था)।
सुरक्षा पर ‘ताला’: पुलिस रूम बना शो-पीस
बस स्टैंड पर यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए एक समर्पित पुलिस रूम (Police Booth) बनाया गया था। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि इस पुलिस रूम पर हमेशा ताला जड़ा रहता है।
रात के समय असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बस स्टैंड के आसपास बढ़ जाता है।
पुलिस की अनुपस्थिति में यात्री खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।
करोड़ों की लागत से बनी इस संपत्ति की निगरानी करने वाला कोई नहीं है।
स्वच्छता के दावों की खुली पोल: नरक बने वॉशरूम
प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत अभियान के दावों के विपरीत, यहाँ के वॉशरूम्स (शौचालय) की स्थिति बेहद नारकीय है।
सफाई का अभाव: शौचालयों में नियमित सफाई नहीं होने के कारण भयंकर दुर्गंध आती है, जिससे यात्रियों का वहां खड़ा होना भी दूभर है।
महिलाओं को परेशानी: सबसे अधिक परेशानी महिला यात्रियों को होती है, जिन्हें मजबूरी में इन गंदे वॉशरूम्स का उपयोग करना पड़ता है या फिर घंटों इंतजार करना पड़ता है।
पानी की समस्या: कई बार नलों में पानी नहीं होता, जिससे गंदगी और ज्यादा बढ़ जाती है।
यात्रियों का सवाल: जिम्मेदार कौन?
स्थानीय यात्रियों का कहना है कि प्रशासन ने पत्थर और सीमेंट पर तो करोड़ों खर्च कर दिए, लेकिन सेवा और सुरक्षा प्रदान करना भूल गया। यदि पुलिस रूम पर ताला ही रखना था, तो इसे बनाने का औचित्य क्या था? और यदि नगर परिषद सफाई का टेंडर जारी करती है, तो फिर सफाई कर्मचारी यहाँ से नदारद क्यों रहते हैं?




















