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गुरुचरण विश्वविद्यालय में 77वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, रील मेकिंग प्रतियोगिता के विजेताओं को किया गया सम्मानित

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गुरुचरण विश्वविद्यालय में 77वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, रील मेकिंग प्रतियोगिता के विजेताओं को किया गया सम्मानित
प्रे.स. शिलचर, 28 जनवरी:
गुरुचरण विश्वविद्यालय में सोमवार को देश का 77वां गणतंत्र दिवस उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय ध्वज फहराकर किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. निरंजन राय, कुलसचिव डॉ. विद्युत कांति पाल एवं शैक्षिक कुलसचिव डॉ. अभिजीत नाथ सहित विभिन्न विभागों के प्राध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. निरंजन राय ने कहा कि एक समय भारत अत्यंत समृद्ध और विकसित देश था, लेकिन कुछ कमजोरियों के कारण अंग्रेजों ने देश में प्रवेश कर भारत की संपदा का दोहन किया और हमें गुलामी की जंजीरों में बांध दिया। उन्होंने कहा कि 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी कई दशकों तक भारत विभिन्न क्षेत्रों में विदेशी निर्भरता से जूझता रहा, लेकिन आज भारत तेजी से आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की जिम्मेदारी आज की पीढ़ी को ही निभानी होगी। संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के साथ-साथ नागरिक कर्तव्यों के निर्वहन पर भी उन्होंने विशेष जोर दिया।
कुलसचिव डॉ. विद्युत कांति पाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि स्वतंत्रता मांगने से नहीं मिलती, बल्कि उसे संघर्ष करके हासिल करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सजग नागरिक के रूप में हमें सतर्क रहना होगा, क्योंकि जिस स्वतंत्रता को हमने पाया है, असावधानी बरतने पर उसे खोने का खतरा भी रहता है। उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक परिवेश से सीख लेने की आवश्यकता पर बल दिया।
शैक्षिक कुलसचिव डॉ. अभिजीत नाथ ने स्वदेशी विचारधारा को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि देशी उत्पादों के उपयोग, देशी संस्कृति के संरक्षण और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने से ही स्वतंत्रता की सच्ची रक्षा संभव है। नई शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें मातृभाषा को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि जब तक हम अपनी भाषा का सम्मान नहीं करेंगे, तब तक देश का सम्मान भी नहीं कर सकते।
इसके बाद विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा कई सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। समवेत स्वर में ‘वंदे मातरम्’ के गायन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इसी क्रम में, गुरुचरण विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग की पहल पर मंगलवार को विश्वविद्यालय के सभागार में रील मेकिंग प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. निरंजन राय, कुलसचिव डॉ. विद्युत कांति पाल, शैक्षिक कुलसचिव डॉ. अभिजीत नाथ, डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर डॉ. जयदीप पाल, आईक्यूएसी के निदेशक डॉ. कृष्णचंद्र दास तथा विभागाध्यक्ष डॉ. संदीपा दास शील उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि यह प्रतियोगिता पिछले वर्ष अक्टूबर माह में आयोजित की गई थी, जिसका विषय था “दुर्गापूजा: मोमेंट्स ऑफ मां दुर्गा”।
विभागाध्यक्ष डॉ. संदीपा दास शील ने बताया कि इस प्रतियोगिता में देश के पांच राज्यों के विभिन्न महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कुल 71 रील प्राप्त हुईं, जिनमें रचनात्मकता, तकनीकी दक्षता के साथ-साथ दुर्गापूजा जैसे महान धार्मिक उत्सव के प्रति श्रद्धा, संस्कृति और परंपरा का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
निर्णायक मंडल के निर्णय के अनुसार कछार कॉलेज के छात्र अमृतम नाथ ने प्रथम स्थान, गुरुचरण विश्वविद्यालय की छात्रा मृदुस्मिता राजबंशी ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। तृतीय स्थान संयुक्त रूप से देवोपम राय (गुरुचरण विश्वविद्यालय) एवं सुप्रतिम देव (तेजपुर विश्वविद्यालय) को मिला। इसके अलावा असम विश्वविद्यालय के स्वप्नदीप सेन को विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
रील मेकिंग प्रतियोगिता के को-ऑर्डिनेटर डॉ. ज्योतिष दत्त ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में कौशल विकास और रचनात्मकता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

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