गुरुचरण विश्वविद्यालय में इकोसिस्टम संरक्षण पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
शिलचर, 04 फरवरी।
प्रकृति संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से गुरुचरण विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग तथा इकोलॉजी एवं एनवायरनमेंटल साइंस विभाग के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “इकोसिस्टम का अवक्षय और स्थानीय पुनरुद्धार” रहा।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के पंजीयक डॉ. विद्युत कांती पाल, शैक्षणिक पंजीयक डॉ. अभिजीत नाथ तथा बराक इकोसिस्टम एंड वाटर गवर्नेंस रिसोर्स सेंटर (BEWGRC) के संयोजक स्वपन आशांगबाम विशेष रूप से उपस्थित थे।
कार्यक्रम की शुरुआत स्किल डेवलपमेंट सेल के संयोजक डॉ. सुभाष देवनाथ के स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद आयोजित तकनीकी सत्र में प्रथम वक्ता के रूप में तारेंग एग्रीकल्चर सर्विस ग्रुप की अध्यक्ष एवं BIKACHSI एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की सीईओ सानालेम्बी देवी ने स्थानीय बीज संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने रूपाबिल ऑक्स-बो झील के लगातार हो रहे पर्यावरणीय क्षरण पर भी गहरी चिंता व्यक्त की।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता स्वपन आशांगबाम ने कछार जिले में स्थानीय इकोसिस्टम के पुनरुद्धार हेतु किए जा रहे विभिन्न प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बराक घाटी में एक स्वस्थ और टिकाऊ पर्यावरण के निर्माण के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी और सामूहिक प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं।
इस अवसर पर IUCN की फेलो सलमा सुल्ताना ने बराक नदी के तटीय समुदायों की जीवनशैली पर आधारित एक जानकारीपूर्ण फोटो स्टोरी प्रस्तुत की, जिसे विद्यार्थियों ने विशेष रुचि के साथ देखा।
कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों के साथ एक इंटरैक्टिव सत्र के माध्यम से हुआ। पूरे कार्यक्रम का समन्वय बायोटेक्नोलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. सौमित्र नाथ ने किया, जबकि संचालन बीबीए विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. दीपराज चक्रवर्ती ने किया।




















