गुरुचरण विश्वविद्यालय में एस्ट्रोनॉमी सॉफ्टवेयर प्रशिक्षण एवं रात्रिकालीन आकाश अवलोकन शिविर आयोजित
शिलचर, 25 फरवरी: आगामी 28 फरवरी को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के उपलक्ष्य में गुरुचरण विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग द्वारा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा एवं अनुसंधान के प्रति रुचि जागृत करने के उद्देश्य से “एस्ट्रोनॉमी सॉफ्टवेयर का व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं रात्रिकालीन आकाश अवलोकन शिविर” का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मंगलवार अपराह्न 4 बजे विश्वविद्यालय के सभागार में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का आयोजन असम विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग स्थित ‘आईयूका सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी रिसर्च एंड डेवलपमेंट’ के सहयोग से किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. निरंजन राय उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. हिमाद्रि शेखर दास ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त भौतिकी विभाग की अध्यक्ष डॉ. इंदिरा डे, सहायक प्राध्यापक डॉ. राजर्षि कृष्ण नाथ सहित विभिन्न विभागों के प्राध्यापकगण एवं विश्वविद्यालय तथा अन्य शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राएँ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। अपने संबोधन में कुलपति प्रो. निरंजन राय ने महान वैज्ञानिक सी. वी. रमन के विज्ञान जगत में योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया तथा भौतिकी विभाग की इस पहल की सराहना की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी विभाग इस प्रकार के ज्ञानवर्धक कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा। उल्लेखनीय है कि कॉलेज से विश्वविद्यालय में उन्नयन के बाद भौतिकी विभाग द्वारा आयोजित यह पहला प्रमुख कार्यक्रम है।
मुख्य वक्ता डॉ. हिमाद्रि शेखर दास ने ‘Astronomy in the First Century: Challenges, Opportunities and Expectations’ विषय पर विस्तृत व्याख्यान देते हुए आधुनिक खगोल विज्ञान की संभावनाओं एवं चुनौतियों पर प्रकाश डाला तथा विद्यार्थियों को अनुसंधान के क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रेरित किया।
प्रशिक्षण सत्र में डॉ. भास्कर गोस्वामी ने एस्ट्रोनॉमी सॉफ्टवेयर के प्रयोग एवं उसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया। विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रशिक्षण में भाग लिया।
कार्यक्रम के द्वितीय चरण में रात्रिकालीन आकाश अवलोकन शिविर आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने दूरबीन के माध्यम से आकाशीय पिंडों का अवलोकन किया और विशेषज्ञों से उनके संबंध में जानकारी प्राप्त की।
अंत में डॉ. राजर्षि कृष्ण नाथ ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया, जिसके साथ कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ।