घरेलू गैस संकट गहराया, कालाबाजारी और प्रशासनिक उदासीनता पर उठे गंभीर सवाल
प्रेरणा ब्यूरो शिलचर, 26 मार्च: क्षेत्र में घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) की गंभीर कमी ने आम लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया है। घर-घर में खाना पकाने के लिए गैस की भारी किल्लत के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि जब आम उपभोक्ताओं को सिलेंडर नहीं मिल रहे, तो दुकानों और होटलों तक घरेलू सिलेंडर कैसे पहुंच रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों—जैसे होटल, ढाबे और फास्ट फूड दुकानों—में खुलेआम घरेलू सिलेंडरों का उपयोग किया जा रहा है, जबकि इस पर पहले से ही सरकारी प्रतिबंध लागू है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई न होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
गैस की कमी का असर बाजार पर भी साफ दिख रहा है। तैयार खाद्य पदार्थों की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं। दुकानदार इस बढ़ोतरी के लिए गैस संकट को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, आम उपभोक्ताओं का कहना है कि ऑनलाइन बुकिंग पिछले लगभग एक महीने से उपलब्ध नहीं है और बुकिंग के बाद भी सिलेंडर मिलने में लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई परिवारों को मजबूरी में केरोसिन स्टोव का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। आरोप यह भी है कि कुछ गैस एजेंसियां और उनके एजेंट उपभोक्ताओं के फोन तक नहीं उठा रहे, जिससे लोगों की परेशानियां और बढ़ गई हैं।
सोशल मीडिया पर लोग खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं और प्रशासन से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। आम जनता को संदेह है कि बड़े पैमाने पर कालाबाजारी का नेटवर्क सक्रिय है, जिसमें कुछ एजेंसियों और बिचौलियों की संलिप्तता हो सकती है।
स्थानीय नागरिकों ने सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अवैध रूप से घरेलू सिलेंडरों की आपूर्ति करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि जल्द सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। लोगों का यह भी कहना है कि यदि पूर्व भारती गैस प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा घर-घर में पाइप कनेक्शन से सप्लाई शुरू कर दी गई होती तो आज यह दिन ना देखना पड़ता। अभी से भी उपभोक्ताओं को यदि कनेक्शन देना शुरू हो जाए तो समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।




















