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डीमा हासाओ में पहली बार मिथुन महोत्सव का आयोजन
जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक विरासत को मिला नया मंच
हाफलांग से दिलीप कुमार की एक रिपोर्ट, 8 जनवरी।
डीमा हासाओ जिले के लायसॉन्ग क्षेत्र के किपेलुआ गांव में हाफलॉन्ग से लगभग 60 किलोमीटर दूर पहाड़ की ऊंची चोटीपर जिले के इतिहास में पहली बार मिथुन महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया है। यह दो दिवसीय उत्सव 8 और 9 जनवरी तक चलेगा, जिसका उद्देश्य जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ मिथुन जैसे पारंपरिक पशुधन के महत्व को उजागर करना है। महोत्सव में मुख्य आकर्षण मिथुन के साथ ही विभिन्न प्रकार के आर्केस्ट्रा, स्थानीय जनजातीयों के भोजन स्टॉल आदि जनता को आकर्षित कर रहे हैं।
उद्घाटन कार्यक्रम में दीमा हसाओ के मुख्य कार्यकारी सदस्य देवोलाल गार्लोसा व स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि मिथुन केवल एक पशु नहीं, बल्कि उत्तर-पूर्व के आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक प्रतिष्ठा और पारंपरिक जीवनशैली का प्रतीक है।
महोत्सव के दौरान पारंपरिक लोकनृत्य, जनजातीय संगीत, सांस्कृतिक झांकियां, स्थानीय हस्तशिल्प प्रदर्शनी तथा पारंपरिक खान-पान की झलक देखने को मिली। इसके साथ ही मिथुन संरक्षण, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
स्थानीय कार्यकारी सदस्य पौदामिंग नृयाउ का कहना है कि इस महोत्सव के माध्यम से न केवल स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, मिथुन की रक्षा के लिए प्रोत्साहन मिलेगा, जिनकी संख्या धीरे-धीरे कम हो रही है बल्कि पर्यटन की संभावनाएं भी विकसित होंगी और युवाओं को अपनी परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलेगा। ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे प्रतिवर्ष आयोजित किए जाने की मांग की है।
मिथुन महोत्सव ने डीमा हासाओ की समृद्ध जनजातीय विरासत को एक नई पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होने की उम्मीद जगाई है।





















