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प्रयागराज में छलकी आस्था का महासंगम!
मकर संक्रांति पर संगम में डुबकी का रिकॉर्ड,
ड्रोन की निगरानी में कैद एक करोड़ श्रद्धालु
(शीतल निर्भीक ब्यूरो)
प्रयागराज। संगम नगरी में माघ मेले के दौरान मकर संक्रांति पर्व पर आस्था का ऐसा महासैलाब उमड़ा कि पूरा मेला क्षेत्र श्रद्धालुओं से भर गया। कड़ाके की ठंड के बावजूद गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम में स्नान के लिए भोर से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। हर-हर गंगे और जय मां गंगा के जयकारों से संगम तट गूंज उठा। मेला प्रशासन के अनुसार शाम पांच बजे तक करीब एक करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई, जबकि देर शाम तक यह संख्या और बढ़ने का अनुमान है। श्रद्धालु सिर पर गठरी, हाथों में झोला और बैग लिए पैदल संगम की ओर बढ़ते नजर आए। साधु-संतों, नागा संन्यासियों और कल्पवासियों की मौजूदगी से मेला क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। पूरे मेला क्षेत्र में पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स और एटीएस की निगरानी रही, वहीं ड्रोन कैमरों से हर गतिविधि पर नजर रखी गई। 24 स्नान घाटों पर विशेष इंतजाम किए गए ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। हाईटेक रिस्पांस प्लान के तहत आधुनिक ट्रैफिक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। नदी की धारा में बदलाव के चलते कुछ घाटों में आंशिक संशोधन भी किया गया। स्नान घाटों और मार्गों पर भीड़ नियंत्रण, किसी को भी मार्गों पर सोने न देने और पैनिक की स्थिति से बचाव के लिए विशेष प्लान लागू रहा। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने जलस्तर के अनुसार तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए, जबकि डीएम मनीष वर्मा ने जल पुलिस को पूरी सतर्कता बरतने को कहा। एसपी नीरज कुमार पांडेय के अनुसार श्रद्धालुओं को उनके आगमन मार्ग के नजदीकी घाट पर ही स्नान कराया जा रहा है ताकि अनावश्यक दबाव न बने। जाम की समस्या से निपटने के लिए आठ संवेदनशील स्थान चिह्नित किए गए हैं, जहां क्यूआरटी टीमें तैनात हैं जो सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर जाम खुलवाती हैं। जाम की स्थिति में संबंधित एसीपी, एसएचओ और एसआई की जवाबदेही तय की गई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए 12 कंपनी पीएसी, सात कंपनी बाढ़ राहत पीएसी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें, आरएएफ, एटीएस, बीडीडीएस और यूपी 112 के चार पहिया व दो पहिया वाहन तैनात किए गए हैं। हजारों की संख्या में पुलिसकर्मी और रिक्रूट आरक्षी मेला व्यवस्था संभाल रहे हैं। वहीं संगम नोज के पास तिलक लगाने वाले पंडों को बैठने न देने से उनमें नाराजगी देखी गई। पंडों का कहना है कि इससे उनकी परंपरागत आजीविका प्रभावित हो रही है और पुलिस-प्रशासन उनके साथ उचित व्यवहार नहीं कर रहा। दूसरी ओर माघ मेले में संगम को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने के लिए जन-जागरण अभियान भी चलाया गया। प्रयागराज सेवा समिति की ओर से निकाली गई यात्रा में तीर्थयात्रियों को संगम के पौराणिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्व के प्रति जागरूक किया गया। कुल मिलाकर मकर संक्रांति पर माघ मेला आस्था, अनुशासन और अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था का सजीव उदाहरण बनकर सामने आया।




















