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प्रश्नपत्रों में गंभीर त्रुटियाँ: असम बंगला साहित्य सभा ने शिक्षामंत्री डॉ. रणोज पेगु का ध्यान आकर्षित किया
प्रेरणा ब्यूरो शिलचर, 26 फरवरी:
राज्य में इस समय महत्वपूर्ण परीक्षाओं का दौर चल रहा है। माध्यमिक और उच्च माध्यमिक परीक्षाएँ जारी हैं। इसी बीच प्रश्नपत्रों में गंभीर त्रुटियों को लेकर लगातार समाचार सामने आ रहे हैं। विशेष रूप से बंगला माध्यम के प्रश्नपत्रों में असमिया शब्दों के अनावश्यक प्रयोग, वाक्य संरचना की गलतियाँ तथा अन्य भाषागत अशुद्धियाँ पाई गई हैं, जिससे विद्यार्थियों और अभिभावकों में चिंता व्याप्त है।
आगामी चुनावी माहौल के कारण यह मुद्दा अपेक्षित गंभीरता नहीं पा सका है। आश्चर्य की बात यह भी है कि बराक घाटी की साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्थाओं की ओर से भी अब तक इस विषय पर कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ऐसी स्थिति में असम बंगला साहित्य सभा आगे आया है। संगठन के राज्यीय महासचिव डॉ. प्रशांत चक्रवर्ती ने राज्य के शिक्षामंत्री डॉ. रणोज पेगु का ध्यान इस गंभीर विषय की ओर आकृष्ट करते हुए आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
डॉ. चक्रवर्ती ने कहा, “हमने माननीय शिक्षामंत्री से अनुरोध किया है कि प्रश्नपत्रों में हो रही त्रुटियों के समाधान हेतु ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएँ। असम सरकार ने असम बंगला साहित्य सभा को राज्य के बंगला माध्यम की सभी पाठ्यपुस्तकों के अनुवाद और संपादन की जिम्मेदारी सौंपी है। एक समय था जब बंगला पाठ्यपुस्तकें अनेक त्रुटियों से भरी होती थीं, लेकिन निरंतर प्रयासों के कारण आज वे लगभग त्रुटिरहित हो चुकी हैं। हमारी मांग है कि बंगला माध्यम के प्रश्नपत्र भी पूरी तरह शुद्ध और त्रुटिरहित रूप में विद्यार्थियों तक पहुँचें।”
उन्होंने आगे कहा कि यदि पाठ्यपुस्तकें और प्रश्नपत्र ही शुद्ध न हों और समाज इस विषय पर मौन बना रहे, तो 19 मई (भाषा शहीद दिवस) या 21 फरवरी (अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस) मनाने का नैतिक अधिकार भी प्रश्नों के घेरे में आ जाता है।
संगठन ने सरकार से मांग की है कि प्रश्नपत्रों को अंतिम रूप देने के बाद विषय-विशेषज्ञों से उनकी गहन समीक्षा कराई जाए और उसके बाद ही उन्हें मुद्रित किया जाए। सभा ने विश्वास व्यक्त किया है कि सरकार इस मांग पर सकारात्मक और त्वरित कार्रवाई करेगी।





















