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बराइल वन्यजीव अभयारण्य के विकास की मांग तेज, ट्रेकिंग प्रेमियों ने पर्यटन केंद्र बनाने पर दिया ज़ोर

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बराइल वन्यजीव अभयारण्य के विकास की मांग तेज, ट्रेकिंग प्रेमियों ने पर्यटन केंद्र बनाने पर दिया ज़ोर

बराइल वन्यजीव अभयारण्य की प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध वन्यजीवन को संरक्षित रखते हुए इसे एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग तेज हो गई है। ट्रेकिंग प्रेमियों और सामाजिक संगठनों के नेताओं ने आरोप लगाया कि लंबे समय से उपेक्षा के कारण यह अभयारण्य अब तक पर्यटकों के लिए समुचित रूप से विकसित नहीं हो पाया है।

असम माउंटेनियरिंग एसोसिएशन के सह-उपाध्यक्ष एवं कार्यकारी अध्यक्ष मृगांक शर्मा ने कहा,
“बराइल क्षेत्र ट्रेकिंग और हाइकिंग के लिए अत्यंत उपयुक्त है। वर्ष 2022 और 2023 में किए गए अभियानों में पाया गया कि यहां के मध्यम श्रेणी के ट्रेकिंग मार्ग बेहद रोमांचक और आनंददायक हैं। ट्रेकिंग मार्गों से डोलू जलप्रपात सहित कई मनमोहक जलप्रपातों का दृश्य दिखाई देता है।”

लगभग 326 वर्ग किलोमीटर के कोर क्षेत्र में फैले इस अभयारण्य में गिबन, जंगली बकरियों सहित कई दुर्लभ वन्य प्रजातियां पाई जाती हैं। इसके बावजूद यहां अब तक कोई निश्चित प्रवेश द्वार, सफारी ज़ोन या अन्य बुनियादी पर्यटन सुविधाएं विकसित नहीं की गई हैं।

मृगांक शर्मा ने सवाल उठाते हुए कहा,
“इतने समृद्ध प्राकृतिक संसाधन होने के बावजूद अब तक ठोस विकास क्यों नहीं हुआ? यदि सुनियोजित ढंग से ट्रेकिंग रूट, कैंपिंग स्थल और अवकाश-आधारित गतिविधियां शुरू की जाएं, तो इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।”

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बराइल क्षेत्र का बांस विश्व-स्तरीय गुणवत्ता का है, जिससे उच्च गुणवत्ता की बांसुरी बनाई जाती है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी मांग है। बांस-आधारित उद्योगों के विकास से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने वर्ष 2022 में गुवाहाटी से बराइल अभयारण्य तक आईआरसीटीसी विस्ताडोम ट्रेन चलाने की मांग को भी दोहराया।

पूर्व एनसीसी कैडेट एसोसिएशन के महासचिव पुलक नाथ ने कहा,
“असम और अगरतला की टीमों के सहयोग से यहां ट्रेकिंग अभियानों को सफलता मिली है। यदि प्रशासन का समुचित सहयोग मिले, तो बराइल की अपार संभावनाओं को वास्तविकता में बदला जा सकता है।”

दोनों वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि संरक्षण और स्थानीय समुदाय के कल्याण को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध विकास ही बराइल अभयारण्य के लिए सबसे उपयुक्त रास्ता है।

अंत में मृगांक शर्मा और पुलक नाथ ने जानकारी दी कि 13, 14 और 15 फरवरी को ‘आरोहण 2.0’ नाम से बराइल ट्रेकिंग एक्सपेडिशन का आयोजन किया जा रहा है। इच्छुक प्रतिभागी 9101944028 या 6900258582 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।

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