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भारतीय संस्कृति का आधार है संस्कार – पं. छोटेलाल त्रिपाठी
भगीरथ संकल्प के साथ सनातन धर्म संस्कृति का कार्य करना परिषद् का मुख्य उद्देश्य – ज्ञानेन्द्र सापकोटा
परिषद् को उसके उद्देश्य के साथ चलना हमारा परम कर्तव्य है – कमलाकान्त त्रिपाठी
वाराणसी, 24 फरवरी: हरियाणा – बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ जी की नगरी काशी में कुछ समसामयिक विषयों पर श्रीकाशी विद्वद्धर्म परिषद् संस्थापित श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास की बैठक परिषद् के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं सम्मानित न्यासी पंडित सुधाकर मिश्र जी के निवास अनुसन्धान परिसर सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी में सम्पन्न हुई। इस अवसर पर परिषद् के विद्वानों ने वर्षभर की कार्य योजना एवं समसामयिक विषयों पर विचार विमर्श किया इस अवसर पर परिषद् की विशिष्ट योजनाओं के माध्यम से समाज को जोड़ने के लिए आज हो रही तमाम विकृतियों को शास्त्रीय ढंग से व्यवस्थित करने के लिए श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास व गुरुकुल एवं मन्दिर सेवा योजना प्रमुख जम्मू कश्मीर प्रान्त डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय ने विस्तार से विषय स्थापन करते हुए विद्वानों के स्वागत किया।
परिषद् के महामंत्री पं. ज्ञानेंद्र सापकोटा ने परिषद् की दूरदर्शी योजना से सभी सदस्यों को अवगत करवाते हुए नवीन प्रस्तावों का वाचन किया। इस अवसर पर परिषद् के प्रवक्ता पं. विजय कुमार शर्मा ने वर्तमान में सवर्णों के लिए सरकार द्वारा लाए गयी कानून पर सरकार का कड़ा विरोध करते हुए परिषद् द्वारा मुख्य न्यायाधीश महोदय को इस ज्वलंत विषय को तत्काल कार्यवाही करते हुए रोकने के लिए सम्मानित करने का निर्णय का विचार किया।
इस अवसर पर परिषद् के मंत्री पं. उमंग नाथ शर्मा जी ने बताया कि सनातन संस्कृति में संस्कार महत्वपूर्ण है और वर्तमान में सरकार हमारे नामकरण संस्कार की अवहेलना करते हुए बच्चे के जन्मदिवस पर ही नामकरण हेतु बाध्य कर रही जो ठीक नहीं है।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं सम्मानित न्यासी पं. सुधाकर मिश्र जी ने बताया कि परिषद् का अखिल भारतीय स्तर पर कार्यक्षेत्र है और हमें ठीक ढंग से विद्वानों को संचालन हेतु अपने नियमावली पर विचार विमर्श करके बढ़ावा देने पर जोर देना चाहिए ताकि समाज में व्यवस्था बनी रहे।
परिषद् के संगठन मंत्री पं. संजय त्रिपाठी ने परिषद् के विस्तार पर जोर दिया।
कार्यक्रम में कार्यकारी अध्यक्ष पं. कमलाकान्त त्रिपाठी जी ने बताया कि परिषद् के उद्देश्य के साथ चलना हमारा परम कर्तव्य है और समय समय पर उचित मार्गदर्शन भी अति आवश्यक है और यह परिषद् के सम्मानित सदस्यों से अपेक्षा भी है।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे पं. छोटेलाल त्रिपाठी जी बताया कि भारतीय संस्कृति का आधार है संस्कार और उसका संरक्षण संवर्धन बहुत ही जरूरी है। इसके लिए परिषद् विविध क्षेत्रों में जाकर कार्य भी करेगी।
अंत में परिषद् के कोषाध्यक्ष पं. आशीषमणि त्रिपाठी ने उपस्थित सम्मानित सदस्यों का धन्यवाद दिया।




















