50 Views
भारत ने विविधता को लोकतंत्र की शक्ति बनाया, शुरुआती शंकाएं गलत साबित हुईं : मोदी
रत्नज्योति दत्ता, ब्यूरो चीफ नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत ने अपनी सामाजिक, सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति में बदल दिया है और स्वतंत्रता के समय व्यक्त की गई आशंकाओं को पूरी तरह गलत साबित किया है। उन्होंने कहा कि देश ने यह सिद्ध कर दिया है कि विविधता लोकतंत्र के मार्ग में बाधा नहीं, बल्कि इसे सुदृढ़ करने वाला तत्व है।
राजधानी में आयोजित कॉमनवेल्थ देशों के स्पीकरों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (CSPOC-2026) का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद कई लोगों ने यह संदेह व्यक्त किया था कि इतनी विविधताओं वाला देश लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रख पाएगा या नहीं।
“भारत ने इन शंकाओं को अवसर में बदला और लोकतंत्र को और मजबूत किया,” उन्होंने कहा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के शुरुआती वर्षों में यह भी माना जाता था कि लोकतंत्र यदि किसी तरह टिक भी गया, तो भारत विकास नहीं कर पाएगा।
“भारत ने यह प्रमाणित कर दिया है कि लोकतांत्रिक संस्थाएं और प्रक्रियाएँ स्थिरता,गति और व्यापक विकास सुनिश्चित करती हैं।”
मोदी ने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। उन्होंने देश की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान प्रणाली बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक, दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक और तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम वाला देश है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत आज तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार, चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क, तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क, दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक और दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बन चुका है।
“भारत में लोकतंत्र का अर्थ अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना है,” मोदी ने कहा।
उन्होंने बताया कि सरकार सार्वजनिक कल्याण की भावना के साथ बिना किसी भेदभाव के हर नागरिक के लिए कार्य कर रही है। इसी नीति के कारण हाल के वर्षों में 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर निकले हैं।
“भारत में लोकतंत्र केवल वादे नहीं करता,बल्कि परिणाम देता है,” उन्होंने कहा।
प्रधानमंत्री ने यह संबोधन पुराने संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में दिया, जहां संविधान सभा ने भारतीय संविधान का निर्माण किया था।
उन्होंने अपने भाषण को सम्मेलन की थीम ‘संसदीय लोकतंत्र की प्रभावी डिलीवरी’ से जोड़ा।
भारत को ‘लोकतंत्र की जननी’ बताते हुए मोदी ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक परंपरा हजारों वर्षों पुरानी है।
उन्होंने वैदिक सभाओं, बौद्ध संघों की चर्चा परंपरा और तमिलनाडु के 10वीं शताब्दी के ग्राम सभा अभिलेखों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने सदियों से संवाद और सहमति की संस्कृति को अपनाया है।
इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और सोशल मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डाला।
उन्होंने इनके दुरुपयोग से फैलने वाली गलत सूचनाओं, साइबर अपराध और सामाजिक विभाजन को गंभीर चुनौती बताया और कहा कि नैतिक एआई तथा जवाबदेह सोशल मीडिया आज समय की अनिवार्य आवश्यकता हैं।




















