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मध्यम वर्ग का “गोल्ड” मेडल

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मध्यम वर्ग का “गोल्ड” मेडल
बाज़ार में सोने के भाव ने, छुआ है आसमान,
पर हमारी गृहणियों का देखो, निराला है स्वैग और शान।
तिजोरी भले ही खाली हो, पर घर में ‘गोल्ड’ की खान है,
हर मध्यमवर्गीय नारी आज, बनी ‘गोल्ड’ की सुल्तान है!
सुबह की शुरुआत होती है, टाटा टी गोल्ड की चुस्की से,
पति को चाय पिलाती हैं, बड़ी ही चालाकी और फुर्ती से।
पड़ोसन से कहती हैं, “बहन, हम तो रोज़ सोना पीते हैं,”
भले ही फटे हुए बनियान में, पतिदेव हमारे जीते हैं!
नाश्ते में परोसा जाता है, मारी गोल्ड का बिस्कुट कड़क,
बच्चे खाते हैं ‘सोना’, उनकी सेहत में आती है धड़क।
मम्मी कहती हैं शान से, “देख बेटा, हम कितने रईस हैं,
हर सुबह बिस्कुट के पैकेट में, गोल्ड की बीस पीस हैं!”
दोपहर को जब सताती है, कमज़ोरी और थोड़ी थकान,
तो च्यवनप्राश गोल्ड खाकर, बढ़ाती हैं अपनी जान।
सासू माँ को भी खिलाती हैं, ताकि उनका गुस्सा शांत रहे,
सोना रग-रग में दौड़ेगा, तो शायद जुबान भी लगाम रहे!
हाथ पोंछने को भी अब, आम कागज़ नहीं भाता है,
रॉयल गोल्ड टिश्यू पेपर ही, डाइनिंग टेबल पर आता है।
खाना बनता है फॉर्च्यून राइस ब्रान गोल्ड के तेल में,
पूरी फैमिली लगी हुई है, इस ‘गोल्डन’ हेरा-फेरी के खेल में!
ईडी (ED) वाले भी आए, तो बेचारे चकरा कर लौट जाएँगे,
रसोई के डिब्बों में उन्हें, सिर्फ ‘गोल्ड’ ही ‘गोल्ड’ नज़र आएँगे।
अधिकारी सोचेंगे, “इतना सोना? पर ज़ब्त कैसे करें भाई?
ये तो विम लिक्विड गोल्ड है, जिससे होती बर्तनों की सफाई!”
पति बेचारा खड़ूस है, और बच्चे थोड़े शैतान हैं,
सास-ससुर की सेवा में, निकले इनके प्राण हैं।
पर इन महिलाओं का हक है, ये ‘गोल्ड’ वाला अधिकार,
जब असली सोना पहुँच से बाहर, तो किराना ही सही यार!
शौक बड़ी चीज़ है भाई, चाहे वो कागज़ का ही सोना हो,
भारतीय नारी का जलवा है, चाहे घर का कोई कोना हो।
तो बोलो जोर से, मध्यम वर्ग की जीत हमेशा जारी है,
असली सोने पर भारी, अपनी ‘ग्रोसरी गोल्ड’ वाली नारी है!
डॉ मधुछन्दा चक्रवर्ती
बेंगलुरू

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