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“महाशिवरात्रि – एक उत्सव ही नहीं चेतना का जागरण है”

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“महाशिवरात्रि – एक उत्सव ही नहीं चेतना का जागरण है”
जब पूरी सृष्टि शिवत्व में डूब जाती है एक साधक जागता है, और उसका अहंकार सो जाता है। शिव सूत्र में नारद महर्षि कहते है  “प्रेम में अहंकार विलीन हो जाता है।”
शिवरात्रि हर महीने आती है। कृष्ण पक्ष चतुर्दशी का दिन मासिक शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। माघ मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का उत्सव मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन शिव-पार्वती विवाह हुआ था। शिव-पार्वती के मिलन का शुभ अवसर है महाशिवरात्रि। शैविज़्म के अनुसार ३६ तत्वों में से प्रथम तत्व साक्षात शिव हैं और अंतिम तत्व पृथ्वी है, जिसकी स्वामिनी साक्षात शक्ति हैं, और महाशिवरात्रि को शिव तत्व पृथ्वी तत्व को स्पर्श करता है। यह एक पवित्र दिवस है।
इस दिन शिव जी की पूजा की जाती है। शास्त्रों में शिव को अभिषेक-प्रिय कहा गया है। दूध, दही, घी, गुड़ और शहद से शिव जी का स्नान करके उनका गंगाजल और मंत्रों से अभिषेक करते हैं। बिल्व / बेल पत्र और धतूरा के फल चढ़ाकर षोडश पूजा तथा फूल-मालाओं से शिव जी का श्रृंगार करते हैं।
भगवान शिव और माता पार्वती के अमर प्रेम की कहानी है उनका विवाह। शिव महापुराण के अनुसार शिव-पार्वती के ५४ विवाह हुए हैं। महाशिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र और अमर प्रेम की कथा है।
जब-जब भी संसार पर विपदा आती है, शिव जी सारी विपदा अपने ऊपर ले लेते हैं, चाहे वह हलाहल विष पीना हो या श्मशान में भी विराजमान होना हो। शिवजी के बहुत सारे नाम हैं। “शम करोति इति शंकर” — जो सबमें शांति लाते हैं, वे शंकर हैं। शिव का अर्थ कल्याण होता है, जो सबका कल्याण करते हैं, वे शिव हैं। भोलेनाथ वह हैं जो उन्हें मारने आने वाले राक्षस को भी वरदान देने वाले है मेरे भोले भंडारी हैं। रुद्र अर्थात वेदों का हृदय हैं। ये सारे नाम उनके गुणों को प्रदर्शित करते हैं।
सारी विद्याओं के स्वामी शिव जी हैं। सबकी इच्छा पूरी करने वाले भी शिव जी ही हैं, पर स्वयं के लिए कभी कुछ नहीं करते। न कोई घर, न कोई गाड़ी, न भव्य वस्त्र — ऐसे हैं मेरे त्रिपुरारी।
महाशिवरात्रि सभी साधकों के लिए सुनहरा अवसर है शिवतत्व को अनुभव करने का, उसके एक कदम और करीब जाने का। सब लोग शिव मंदिर जाकर शिव जी का जल और दूध से अभिषेक करते हैं। सुबह से ही साधक नित्य साधना करके रुद्र पूजा करते हैं और “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते हैं। रात को शिव जी के भजन गाए जाते हैं। रात्रि जागरण किया जाता है। भारत में कई स्थानों पर महाशिवरात्रि १५ दिन का उत्सव होता है।
इस दिवस विश्व कल्याण का संकल्प लिया जाता है — सबकी भलाई का संकल्प, सबका स्वास्थ्य अच्छा रहे, सभी सुखी और खुश रहें, एक-दूसरे की मदद करें — ऐसा संकल्प लिया जाता है। विश्व शांति के लिए संकल्प लिया जाता है।
शिव को प्रलय या परिवर्तन के देवता भी कहा जाता है। कुछ लोग परिवर्तन में सहज नहीं महसूस करते। आने वाला समय परिवर्तन का है। अगले कुछ वर्षों में परिवर्तन को अपने जीवन का अंग बनाकर चलना होगा। वैश्विक चेतना में परिवर्तन का समय शुरू हो चुका है। हर परिवर्तन बुरा नहीं होता। जब तक पुराना जाएगा नहीं, तब तक नया आएगा कैसे?
महाशिवरात्रि की सभी शिव भक्तों को शुभकामनाएं। भोलेनाथ की कृपा सदा ही आप पर बनी रहे।
स्वामी सत्यानंद

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