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मारवाड़ी युवा मंच शिलचर ने स्व. सागर रविदास के परिवार को दी आर्थिक सहायता, उठे मानवीय संवेदना के सवाल

विशेष प्रतिनिधि, शिलचर, 20 मार्च:
काछाड़ जिले के काशीपुर–पदमपुर चाय बागान निवासी मजदूर सागर रविदास की शिलचर मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में उपचार के दौरान 7 मार्च की रात मृत्यु हो गई। आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर स्थिति के कारण परिवार अस्पताल का बिल चुकाने में असमर्थ था। परिजनों का आरोप है कि इसी वजह से मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने प्रारंभ में शव सौंपने से इंकार कर दिया।
मृतक के पास Ayushman Bharat कार्ड या अन्य किसी सरकारी सुविधा का अभाव था, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। ऐसे कठिन समय में सामाजिक संगठन Marwari Yuva Manch की शिलचर शाखा मदद के लिए आगे आई। पूर्व विधायक एवं श्रमिक नेता Rajdeep Goala के सहयोग से अस्पताल का बकाया बिल चुकाया गया, जिसके बाद मृतक का शव परिजनों को सौंपा गया और परिवार अंतिम संस्कार कर सका।
घटना के बाद शुक्रवार को वरिष्ठ पत्रकार दिलीप कुमार के साथ मंच के पदाधिकारी विवेक जैन और विशाल सांड मृतक के घर पहुंचे। उन्होंने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी, आर्थिक सहायता प्रदान की और भविष्य में हर संभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।
हालांकि सागर रविदास के परिवार को समय पर सहायता मिल गई, लेकिन इस घटना ने एक गंभीर सामाजिक प्रश्न खड़ा कर दिया है—ऐसे गरीब परिवारों का क्या होता है जो अस्पताल का बिल चुकाने में सक्षम नहीं होते?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, केवल बिल न चुकाने के आधार पर शव रोकना मानवीय और कानूनी दृष्टि से उचित नहीं है। भारत के संविधान के Article 21 of the Constitution of India के तहत व्यक्ति की गरिमा की रक्षा एक मौलिक अधिकार है, जो मृत्यु के बाद भी लागू होता है।
साथ ही सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण मामले Pt. Parmanand Katara v. Union of India से जुड़े सिद्धांतों में चिकित्सा व्यवस्था में मानवीय दृष्टिकोण को सर्वोपरि बताया गया है।
यह घटना न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करती है, बल्कि समाज और प्रशासन के सामने यह सवाल भी रखती है कि गरीब और असहाय लोगों के लिए आपात स्थितियों में अधिक संवेदनशील और प्रभावी व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जाए।


















