फॉलो करें

लखीपुर सह-जिला बायो डायभार्सिटि कंजर्वेशन समिति ने मंत्री कौशिक को सौंपा ज्ञापन

16 Views
लखीपुर सह-जिला बायो डायभार्सिटि कंजर्वेशन समिति ने मंत्री कौशिक को सौंपा ज्ञापन
शिलचर 12 जनवरी: लखीपुर विधानसभा नुंगफू-चिरिपार प्रथम खंड  में मीठे पानी की धनुषाकार चीरी झील स्थित है। “लखीपुर सह-जिला बायो डायभार्सिटि कंजर्वेशन समिति” ने इस झील की जैव विविधता, पारिस्थितिक विरासत और जैविक संसाधनों को परिवर्तन से बचाने के लिए पहल की है। समिति के आज अधिकारियों ने राज्य के मंत्री कौशिक राय से मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि ऑक्स-बो चीरी झील और बराक नदी के बीच एक संकरा मार्ग है। यह संकरा मार्ग अब इस झील के लिए खतरा बन गया है। बराक नदी का कटाव से इसका भीषण  क्षति हुई है। यहां की विशेषता है कि एक प्रकार की प्रवासी पक्षियों का झुंड, जिनके आवाज से ऐसा लगता है मानों किसी मधुर संगीत जैसी प्रतीत होता है। ये प्रवासी पक्षीओं का रैला हर वर्ष अक्टूबर में इस झील पर आता है और फरवरी तक यहीं रहता है। दिन के समय, पक्षियों का झुंड झील के पानी में रहता है और रात में, वे झील के किनारे के पेड़ों पर अपना बसेरा करते हैं। बायो डायभार्सिटि कंजर्वेशन समिति के अधिकारी इन प्रवासी पक्षियों को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि दिन के दौरान जब स्थानीय लोग और उपद्रवी तत्व झील पर आते हैं, तो वे अक्सर इन प्रवासी पक्षियों को मार डालते हैं। स्थानीय क्लब के सदस्य उन्हें रोकने में असफल रहे हैं। संबंधित सरकारी विभागों के लिए इस मुद्दे पर आम जनता में जागरूकता पैदा करने पर ध्यान देना अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रवासी पक्षियों का संरक्षण और नुंगफू को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है।संगठन ने 14 अगस्त, 2024 को पर्यावरण संरक्षण पर एक जागरूकता सभा का आयोजन किया था।मंत्री जी स्वयं इस कार्यक्रम में उपस्थित थे और उन्होंने इस प्रयास का स्वागत और प्रशंसा की।यह भी कहा गया कि यदि संभव हो तो मत्स्य विकास निगम, वन और पर्यावरण विभाग के हस्तक्षेप से ऑक्स-बो-झील को जैव विविधता विरासत स्थल में परिवर्तित किया जा सकता है।
यह घुमावदार झील अब एक प्राकृतिक आपदा का सामना कर रही है। झील और बरक नदी के बीच कटाव के कारण मौजूदा चिकन नेक झील को नुकसान पहुँचने की कगार पर है और यह धीरे-धीरे बाराक नदी में समाहित हो जाएगी। इस प्राकृतिक आपदा से झील की रक्षा करने का यही सही समय है। संगठन ने मंत्री जी से अपील की है कि सरकार द्वारा जनता के हित में झील, प्रवासी पक्षियों, विविध वनस्पतियों और जीवों के संरक्षण की व्यवस्था किया जाये और इस ऑक्स-बो झील को जैव विविधता विरासत स्थल घोषित करवाने की व्यवस्था किया जाये।संगठन की ओर से अध्यक्ष सी.एच. मोहन सिंह, महासचिव एल. राजकिशोर सिंह और सहायक महासचिव देबाशीष रॉय उपस्थित थे। इसके  अतिरिक्त, मंत्री कौशिक राय के साथ साक्षात्कार में सचिव सुशीला शर्मा, सी.एच. इबोपिशक, कंगाबम शांतिकुमार सिंह, पी. राजेन सिंह, टी.एच. मोचा सिंह, बानू सिंह और एन.जी. बिरमानी सिंह भी शामिल थे।

Share this post:

Leave a Comment

खबरें और भी हैं...

लाइव क्रिकट स्कोर

कोरोना अपडेट

Weather Data Source: Wetter Indien 7 tage

राशिफल