विधानसभा चुनाव से पहले असम में ‘मणिपुरी ऑटोनॉमस काउंसिल’ गठन की जोरदार मांग
मांग पूरी न होने पर व्यापक आंदोलन की चेतावनी
शिलचर। वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले असम में ‘यूनिफाइड मणिपुरी ऑटोनॉमस काउंसिल’ के गठन की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। मणिपुरी ऑटोनॉमस काउंसिल डिमांड को-ऑर्डिनेशन कमिटी, असम ने राज्य सरकार से इस दीर्घकालिक जनमांग को अविलंब पूरा करने की स्पष्ट चेतावनी दी है। मांग पूरी न होने की स्थिति में बड़े पैमाने पर आंदोलन छेड़ने का भी ऐलान किया गया है।
को-ऑर्डिनेशन कमिटी के आह्वान पर 5 जनवरी को शिलचर की सड़कों पर पांच हजार से अधिक लोगों ने एक विशाल और उत्साहपूर्ण रैली निकाली। इस रैली में मणिपुरी समुदाय के करीब 70 संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। रैली के उपरांत अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन जिला आयुक्त को सौंपा गया।
शनिवार को शिलचर में आयोजित पत्रकार वार्ता में कमिटी के पदाधिकारियों ने बताया कि यदि सरकार शीघ्र सकारात्मक कदम नहीं उठाती है, तो आंदोलन को और व्यापक एवं तीव्र किया जाएगा।
कमिटी के अध्यक्ष तथा सेवानिवृत्त एसीएस अधिकारी के. शांताकुमार सिंह ने कहा कि वर्ष 2020 में असम सरकार ने मोरान, मटक और कोच-राजबंशी—इन तीन समुदायों के लिए स्वायत्त परिषदों का गठन किया, लेकिन ओबीसी श्रेणी में आने वाले मणिपुरी समुदाय के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है, जबकि मणिपुरी समाज पिछले पांच सौ वर्षों से असम में एक जिम्मेदार और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक के रूप में रह रहा है।
उन्होंने बताया कि मणिपुरी ऑटोनॉमस काउंसिल की मांग लंबे समय से चली आ रही है और विभिन्न अवसरों पर सरकार के समक्ष इसे रखा गया। सरकार की ओर से नीतिगत रूप से इस मांग को स्वीकार भी किया गया था, लेकिन अब तक इसे अमल में नहीं लाया गया।
कमिटी के अध्यक्ष ने बताया कि 7 दिसंबर 2024 को शिलचर के पुलिस गेस्ट हाउस में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात के दौरान इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई थी। उस समय मुख्यमंत्री ने सकारात्मक रुख दिखाया था, हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि यदि यह बातचीत कुछ माह पहले होती तो बेहतर रहता।
उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान लक्ष्मीपुर में चुनाव प्रचार के समय, मणिपुर के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की उपस्थिति में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मणिपुरी स्वायत्त परिषद के गठन के लिए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी मांग अधूरी है।
के. शांताकुमार सिंह ने कहा कि सांस्कृतिक रूप से समृद्ध मणिपुरी समुदाय आज पहचान, शिक्षा, संस्कृति और आर्थिक विकास जैसी कई समस्याओं से जूझ रहा है। इन सभी चुनौतियों से उबरने के लिए असम में स्वायत्त परिषद का गठन समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि मणिपुरी समाज के लोग पूरे असम में विभिन्न स्थानों पर बसे हुए हैं—चाहे वह बांग्लादेश सीमा से सटे कटिगोड़ा क्षेत्र के गांव हों या अरुणाचल प्रदेश सीमा के निकट मार्गेरिटा के गांव। ऐसे में समुदाय के समग्र विकास और एकीकरण के लिए यूनिफाइड मणिपुरी ऑटोनॉमस काउंसिल का गठन अनिवार्य है। साथ ही, हालिया परिसीमन के बाद मणिपुरी समुदाय से विधायक या सांसद चुने जाने की संभावना भी नगण्य हो गई है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि वे राज्य के सर्वांगीण विकास और सभी समुदायों के समान उत्थान के प्रति प्रतिबद्ध हैं। इसलिए उन्हें पूर्ण विश्वास है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री इस दिशा में विशेष पहल करेंगे। उन्होंने मंत्री कौशिक राय, शिलचर विधायक दीपायन चक्रवर्ती, सांसद परिमल शुक्लवैद्य और कणाद पुरकायस्थ सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के सकारात्मक रुख का भी उल्लेख किया।
हालांकि, को-ऑर्डिनेशन कमिटी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही मांग पूरी नहीं की गई, तो राष्ट्रीय राजमार्ग अवरोध, विशाल रैलियां, जनसभाएं और अन्य आक्रामक आंदोलनात्मक कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे।
पत्रकार सम्मेलन में कमिटी के आह्वायक के.एस.एच. सिंहजीत, सह-आह्वायक डॉ. के.एच. राजू सिंह, उपदेष्टा एम. सूर्यकुमार शर्मा, उपदेष्टा के.एस.एच. उमानंद सिंह सहित कई प्रमुख सदस्य उपस्थित थे।





















