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विश्व हिंदी दिवस पर बराक हिंदी साहित्य समिति द्वारा स्मृति संगोष्ठी का आयोजन

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विश्व हिंदी दिवस पर बराक हिंदी साहित्य समिति द्वारा स्मृति संगोष्ठी का आयोजन
विशेष प्रतिनिधि शिलचर, 11 जनवरी ।
विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर बराक हिंदी साहित्य समिति, शिलचर की ओर से हिंदी भवन परिसर में स्वर्गीय प्रमिला गोस्वामी स्मृति अकादमिक संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय था— “बराक घाटी में हिंदी की दशा और दिशा”। कार्यक्रम में हिंदी भाषा के शैक्षणिक, साहित्यिक एवं सामाजिक पक्षों पर गंभीर विमर्श हुआ।
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में गुरु गुरूचरण विश्वविद्यालय, शिलचर के माननीय कुलपति प्रो. निरंजन रॉय को सम्मानित किया गया। उद्घाटन भाषण में उन्होंने कहा कि हिंदी राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन से भविष्य में और अधिक विद्यार्थियों को हिंदी अध्ययन का अवसर मिलेगा।
बराक हिंदी साहित्य समिति के अध्यक्ष श्री उदय शंकर गोस्वामी ने विश्व हिंदी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसकी पृष्ठभूमि 1975 में नागपुर में आयोजित प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन से जुड़ी है तथा वर्ष 2006 से इसे औपचारिक रूप से विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
संगोष्ठी के संयोजक एवं वुमेनस कालेज, शिलचर के प्राचार्य डॉ. सुजीत तिवारी ने अपने वक्तव्य में संगोष्ठी के उद्देश्यों, हिंदी अध्ययन के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं, तथा बराक घाटी के विद्यालयों और महाविद्यालयों में हिंदी पढ़ने-पढ़ाने से जुड़ी चुनौतियों और कठिनाइयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस संगोष्ठी का उद्देश्य नई पीढ़ी को इन मुद्दों से अवगत कराना है, ताकि सार्थक समाधान की दिशा में ठोस पहल हो सके।
कार्यक्रम में अनेक प्रतिष्ठित शिक्षाविदों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें प्रो. पीयूष पांडेय (निदेशक, आईक्यूएसी एवं प्रोफेसर, माइक्रोबायोलॉजी, असम विश्वविद्यालय), प्रो. रामशंकर (सांख्यिकी विभाग, असम विश्वविद्यालय), श्री सुरेंद्र उपाध्याय (हिंदी अधिकारी, असम विश्वविद्यालय) तथा जवाहर नवोदय विद्यालय, पैलापूल के प्राचार्य विश्वास राणा प्रमुख रहे।
इस अवसर पर आमंत्रित वक्तव्य डॉ. आकाश वर्मा, अध्यक्ष, हिंदी विभाग, असम विश्वविद्यालय, शिलचर द्वारा प्रस्तुत किया गया। ईसमे पुर्व अध्यक्ष  परमेश्वर लाल काबरा ने भी अपना भाषण रखा।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना एवं हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ से हुआ। इस अवसर पर बालार्क प्रकाशन द्वारा प्रकाशित तीन पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया, जिनमें एक सुप्रसिद्ध साहित्यकार अशोक वर्मा द्वारा संपादित कपिल उपाध्यायजी की कविताओं का संकलन भी शामिल था।
समिति द्वारा हिंदी के प्रचार-प्रसार में निरंतर सेवा देने के लिए श्री दिलीप कुमार सहित पाँच विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। श्री दिलीप कुमार ने बराक घाटी में हिंदी की विकास यात्रा पर प्रेरक विचार प्रस्तुत किए। साथ ही, असम सरकार के ‘युवा लेखक पुरस्कार’ से सम्मानित रचनाकारों को भी मंच से अभिनंदित किया गया।
समिति के सचिव श्री प्रदीप कुमार कुर्मी ने जानकारी दी कि किस प्रकार समिति के प्रयासों से पुरस्कार श्रेणी में हिंदी भाषा को सम्मिलित कराया गया।
अकादमिक सत्र में शोध-आधारित उत्कृष्ट पत्रों का पाठ हुआ, जिसकी अध्यक्षता प्रो. आकाश वर्मा, प्रो. रामशंकर एवं श्री सुरेंद्र उपाध्याय ने संयुक्त रूप से की। सत्र में विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षाविदों और शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही।
कार्यक्रम में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ गीत एवं नृत्य भी आकर्षण का केंद्र रहीं। समिति के अनेक पदाधिकारी, जिनमें  कन्हैयालाल सिंगोदिया, अनूप कुमार महतो, युगल किशोर त्रिपाठी, राजन कुवंर, किरण त्रिपाठी और प्रमोद जायसवाल प्रमुख रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती बिंदु सिंह यादव ने किया।
समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
बराक हिन्दी साहित्य समिति द्वारा आयोजित यह पहली संगोष्ठी बराक घाटी में हिंदी भाषा के शैक्षणिक और साहित्यिक विकास के प्रति एक महत्वपूर्ण एवं सार्थक पहल सिद्ध हुई।

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