शिलचर | 21 जुलाई –प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत सब्सिडी पर इलेक्ट्रिक ऑटो खरीदने का सपना देख रहे करीब 40 गरीब ऑटो चालकों के साथ करोड़ों की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सिलचर के सोनाई रोड स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शाखा और आऊलिया बाज़ार के यूनिक ऑटोमोबाइल्स (अतुल ग्रीन प्राइवेट लिमिटेड) के मालिक मुस्ताक आलम लश्कर पर यह गंभीर आरोप लगे हैं।
पीड़ितों का आरोप है कि यूनियन बैंक की सोनाई रोड शाखा से उन्होंने PMEGP स्कीम के तहत लोन लिया, और डीलर मुस्ताक आलम को प्रति ई-ऑटो 85,000 रुपये नकद भुगतान किया। इसके बदले में उन्हें ई-रिक्शा तो सौंप दिया गया, लेकिन किसी भी प्रकार के वैध कागज़ात या दस्तावेज नहीं दिए गए।
करीब दो-तीन महीने बाद बैंक प्रबंधक ने चालकों को एक दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर के लिए बुलाया। वहां मौजूद लोगों को हैरानी तब हुई जब दस्तावेज़ में केवल 23,000 रुपये का ही भुगतान दर्ज था। जब उन्होंने आपत्ति जताई और बताया कि वे पहले ही डीलर को 85,000 रुपये दे चुके हैं, तो बैंक मैनेजर कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए।
बाद में बैंक मैनेजर से जब इस बारे में जानकारी मांगी गई—कि सब्सिडी और लोन की वास्तविक स्थिति क्या है—तो दो दिन बाद बातचीत का आश्वासन दिया गया। इसके बाद जब डीलर से संपर्क किया गया, तो उसका जवाब था: “आप तो सब कुछ जानते हैं!”
जांच में यह सामने आया कि डीलर ने बैंक में केवल 23,000 रुपये ही जमा किए थे, जबकि बाकी 58,000 रुपये बैंक मैनेजर और डीलर ने आपसी साजिश से हड़प लिए। इस ठगी से पीड़ित सभी ड्राइवर गरीब परिवारों से हैं, जिन्होंने सरकारी योजना पर भरोसा कर बिना किसी शंका के पैसा जमा किया था।
इतना ही नहीं, ठगी के बाद जब ड्राइवरों ने यूनिक ऑटोमोबाइल्स के शोरूम में ई-रिक्शा की सर्विसिंग करानी चाही, तो वहां भी कोई उचित सुविधा नहीं मिली। गाड़ियों के कोई कागजात तक उपलब्ध नहीं कराए गए।
इस संगठित ठगी से परेशान ड्राइवरों ने सिलचर के रंगीरखाड़ी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है और जिले के प्रशासन व मीडिया के माध्यम से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
इस मामले में जो पीड़ित सामने आए हैं, उनमें अनम उद्दीन, अफतर हुसैन लश्कर, अजीर उद्दीन लश्कर, सुजन उद्दीन लश्कर, निर्मल राय, सुमन दास, गोबेश दास, अब्बास उद्दीन लश्कर, अहमद हुसैन लश्कर और बिजू राय प्रमुख हैं।
अब सवाल यह है कि यूनियन बैंक और यूनिक ऑटोमोबाइल्स के इस गठजोड़ पर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है? क्या गरीब ई-रिक्शा चालकों को न्याय मिलेगा?



















