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शिलचर शंकरमठ में हिंदू सम्मेलन: सनातन धर्म की एकता, आत्मरक्षा और सांस्कृतिक चेतना का आह्वान

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शिलचर शंकरमठ में हिंदू सम्मेलन: सनातन धर्म की एकता, आत्मरक्षा और सांस्कृतिक चेतना का आह्वान

शिलचर, संवाददाता।
शहर के सोनाई रोड स्थित महाप्रभु सरणी के शंकरमठ एवं मिशन मंडप में आज एक भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य सनातन धर्म के प्रति आस्था को सुदृढ़ करना, सामाजिक एकता व भाईचारे को मजबूत करना, समाज में व्याप्त कुरीतियों और भेदभाव को दूर करना, आत्मरक्षा की चेतना जगाना तथा आने वाली पीढ़ी को सनातन जीवन मूल्यों की सही दिशा दिखाना रहा।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) दक्षिण असम पूर्व प्रांत के प्रचार प्रमुख गौरांग राय, विधायक दीपायन चक्रवर्ती, पूर्व विधायक दिलीप कुमार पाल, शंकरमठ एवं मिशन के कार्याध्यक्ष श्रीमद् विज्ञानानंद ब्रह्मचारी महाराज सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। लगभग 500 लोगों की सहभागिता के साथ कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

सम्मेलन की शुरुआत कुमारी पूजा और पंचप्रदीप प्रज्वलन से हुई। भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर विचार-विमर्श का शुभारंभ किया गया। इसके पश्चात अतिथियों का उत्तरिय पहनाकर और फूलों के पौधे भेंट कर सम्मान किया गया।

स्वागत भाषण में हिंदू सम्मेलन के महासचिव शिबु दास ने सनातन धर्म की एकता और संगठित प्रयासों के महत्व पर प्रकाश डाला। अध्यक्ष बिप्लब कुमार दे ने कहा, “हिंदुओं की एकता से ही देश का सर्वांगीण विकास संभव है। सभी को राष्ट्र के प्रति निष्ठावान होकर कार्य करना चाहिए।”

अपने प्रेरक संबोधन में श्रीमद् विज्ञानानंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा, “आज कई लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत को भूलकर विदेशी प्रभावों की ओर बढ़ रहे हैं। हमें ऋषि-मुनियों द्वारा प्रदत्त भारतीय सभ्यता और शिक्षा को पुनः अपनाना होगा। यह देश हिंदुस्तान है—महाराणा प्रताप, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, शंकराचार्य, शिवाजी और स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों की भूमि। अपनी परंपराओं पर गर्व करें, भय का कोई स्थान नहीं।”

अन्य वक्ताओं में प्रदीप कुमार देवशंकर पाल और सेवा बनिक ने भी विचार रखे। शंकरमठ के गीता पाठशाला के छात्र-छात्राओं ने गीता पाठ और सनातनी भजन-संगीत प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध किया।

कार्यक्रम में अमर पाल, सुस्मिता पुरकायस्थ, सुधीर रंजन दास, मितुन दत्त, धीरेंद्र चंद्र दास, दुलाल दास, प्रथमा़ दत्ताराय सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे। संचालन मनोज कांति दास और पिंटू पाल ने किया। अंत में हिंदू एकता के शपथ-पाठ के साथ सभा का समापन हुआ और सभी को प्रसाद वितरण किया गया।

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