सद्भावना और अध्यात्म से ही देश महान बनेगा: सद्गुरुदेव श्री सतपाल जी महाराज
कलियाबोर (असम)।
तेजपुर रोड स्थित कलियाभुमरा सेतु के निकट सोलंग नवगांव में मानव उत्थान सेवा समिति के श्री हंस नाम बोध आश्रम में 7–8 जनवरी को आयोजित दो दिवसीय विशाल सद्भावना सम्मेलन के प्रथम दिन विख्यात समाजसेवी एवं मानव धर्म के प्रणेता परमपूज्य सद्गुरुदेव श्री सतपाल जी महाराज ने कहा कि सद्भावना और अध्यात्म के बिना देश महान नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य के भीतर सद्भावना नहीं होगी, तब तक सर्वांगीण कल्याण संभव नहीं है।

सद्गुरुदेव ने कहा कि हम ‘धर्म की जय, अधर्म का नाश और प्राणियों में सद्भावना’ की बात करते हैं, किंतु इसका वास्तविक अर्थ तभी साकार होगा जब हम सभी प्राणियों को समान दृष्टि से देखेंगे। सद्भावना से ही विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।
सम्मेलन का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जो परमपूज्य सद्गुरुदेव श्री सतपाल जी महाराज, असम सरकार के कैबिनेट मंत्री श्री केशव महंत, परम श्रद्धेय श्री विभु जी महाराज एवं श्री सुयश जी महाराज के कर कमलों द्वारा संपन्न हुआ। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री केशव महंत ने गमछा एवं सोराय भेंट कर सद्गुरुदेव सहित माता श्री अमृता जी, श्री विभु जी महाराज और श्री सुयश जी महाराज का स्वागत किया।
अपने संबोधन में श्री केशव महंत ने कहा कि यह वही पावन भूमि है, जहां महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव ने नाम और ज्ञान का प्रचार किया था। आज उसी परंपरा को सद्गुरुदेव श्री सतपाल जी महाराज आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने सद्गुरुदेव का असम की धरती पर हार्दिक स्वागत एवं आभार व्यक्त किया।
असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंत विश्व शर्मा ने मोबाइल फोन के माध्यम से सम्मेलन को संबोधित करते हुए सद्गुरुदेव का स्वागत किया और मानव उत्थान सेवा समिति द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की सराहना की। उन्होंने असम में सुख-शांति और अखंडता बनाए रखने हेतु सद्गुरुदेव से आशीर्वाद देने का आग्रह किया।
असम विधानसभा के उपाध्यक्ष श्री नुमल मोमिन ने भी सद्गुरुदेव, माता श्री अमृता जी, श्री विभु जी महाराज एवं श्री सुयश जी महाराज का गमछा और झापी से सम्मान किया। अपने वक्तव्य में उन्होंने मानव उत्थान सेवा समिति द्वारा मिशन एजुकेशन और मिशन मेडिसिन के अंतर्गत जरूरतमंद बच्चों एवं मरीजों की सेवा के लिए आभार व्यक्त किया।

दूसरे दिन गुरु वंदना और मधुर भजनों के साथ सत्संग का आयोजन हुआ। देश के विभिन्न हिस्सों से आए संत-महात्माओं ने शास्त्र आधारित आत्मकल्याणकारी विचार प्रस्तुत किए। हरिद्वार से पधारे महात्मा हरिसंतोषानंद जी, दिल्ली से महात्मा सत्यबोधानंद जी तथा सिक्किम से डॉ. जय प्रकाश अग्रवाल जी ने अपने प्रेरणादायक विचार रखे।
अपने अंतिम संबोधन में सद्गुरुदेव श्री सतपाल जी महाराज ने कहा कि आज विश्व में अशांति बढ़ रही है, ऐसे में सद्भावना के माध्यम से ही शांति स्थापित की जा सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सद्भावना की शुरुआत प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं से करनी होगी।
माता श्री अमृता जी और परम श्रद्धेय श्री विभु जी महाराज ने भी सम्मेलन को संबोधित किया। माता जी ने कबीर वाणी का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु की आज्ञा में चलने से व्यक्ति निर्भय होकर अपने लक्ष्य तक पहुंचता है।
सम्मेलन में बच्चों द्वारा प्रस्तुत प्रेरणादायक सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। अंत में परम श्रद्धेय श्री विभु जी महाराज ने कलाकार बच्चों एवं सम्मेलन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सदस्यों को पुरस्कार प्रदान किए।





















