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हाइलाकांदी में पारंपरिक छठ पूजा का भव्य आयोजन, कोइया छठ घाट पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब

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हाइलाकांदी में पारंपरिक छठ पूजा का भव्य आयोजन, कोइया छठ घाट पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब

प्रेरणा भारती, हाइलाकांदी, 27 अक्टूबर:
हाइलाकांदी में सोमवार को बराक घाटी की पारंपरिक छठ पूजा पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ संपन्न हुई। जिले का प्रमुख कोइया छठ घाट श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से खचाखच भरा रहा। प्रातः से ही महिलाएँ पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर पूजा की डलिया सजाए घाट की ओर निकलीं, जहां सूर्य देवता और छठी मैया को अर्घ्य अर्पित करते हुए उन्होंने परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की।

घाट का वातावरण भक्ति भाव, शंखध्वनि और ढोल-नगाड़ों से गूंज उठा। सूर्यास्त के समय पूरा क्षेत्र दीपों की आभा से आलोकित हो उठा। श्रद्धालु जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते हुए “छठी मइया की जय” के जयघोष से आकाश गुंजायमान कर रहे थे।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सत्य नारायण नुनिया (सतना), रौशन पांडे, राम कुमार नुनिया, पूर्व जीपी अध्यक्ष राजू रविदास, शिबू रुद्रपाल, वीडीपी के नारायण राजवार तथा कोइया चाय बागान के पंचायत सदस्य उपस्थित रहे। आयोजकों द्वारा अतिथियों को उत्तरीय पहनाकर सम्मानित किया गया।

पूर्व विधायक राहुल राय भी अपनी धर्मपत्नी और पुत्र के साथ घाट पर पहुंचे और श्रद्धालुओं को छठ पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि “छठ पूजा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, अनुशासन और सामूहिकता की पहचान भी है।”

छठ पर्व सूर्य देवता और छठी मैया के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वाला चार दिवसीय आध्यात्मिक उत्सव है।

  • पहले दिन ‘नहाय-खाय’ से व्रत की शुरुआत,
  • दूसरे दिन ‘खरना’ के साथ उपवास,
  • तीसरे दिन ‘संध्या अर्घ्य’ में डूबते सूर्य को अर्पण,
  • और चौथे दिन ‘उषा अर्घ्य’ में उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन होता है।

इस अवसर पर आयोजक समिति के अध्यक्ष अमित हजाम, सचिव अजय नुनिया, तथा सहयोगियों काजल बाक्ति, मन्ना कुर्मी, उज्जल रुद्रपाल, दिवाकर राजवार, राज कुमार कुर्मी, राम भूवन नुनिया, राज कुमार कोइरी आदि ने सफल संचालन किया। प्रशासन की ओर से पुलिस बल द्वारा सुरक्षा और शांति व्यवस्था के लिए सघन निगरानी रखी गई।

कल सुबह उषा अर्घ्य के साथ छठ महापर्व का विधिवत समापन होगा।
कोइया घाट समेत आसपास के क्षेत्रों में छठ पूजा को लेकर धार्मिक आस्था और लोक उत्सव का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने पूरे हाइलाकांदी जिले को भक्ति के रंग में रंग दिया।

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