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हिंदुओं को संगठित होना होगा, तभी भारत भूमि सुरक्षित रह सकेगी : डॉ. सुनील मोहंती
उधारबंद, निहार कांति राय (प्रेरणा भारती)
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में उधारबंद क्षेत्र के खासपुर शालगंगा दुर्गा मंदिर परिसर में जीपी आधारित शालगंगा मंडल के तत्वावधान में एक विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया।
सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक डॉ. सुनील मोहंती ने बौद्धिक संबोधन देते हुए कहा कि “यदि हिंदू समाज संगठित नहीं हुआ, तो यह भारत भूमि सुरक्षित नहीं रह सकेगी।”
उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म सनातन धर्म है, जो मुनि-ऋषियों की परंपरा से निकला हुआ धर्म है। जब-जब इस धर्म पर संकट आया, तब-तब भगवान ने धरती पर अवतार लेकर धर्म की रक्षा की।
डॉ. मोहंती ने भगवान रामचंद्र के जीवन प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि माता सीता की रक्षा के लिए उन्होंने राक्षस कुल का संहार किया। इसी प्रकार महाभारत काल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि लगभग 5162 वर्ष पूर्व कुरुक्षेत्र युद्ध के दौरान जब अर्जुन अपने ही सगे-संबंधियों को देखकर युद्ध से विमुख हो गए थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें कर्तव्य का बोध कराया, जिसके पश्चात अर्जुन ने शस्त्र उठाए।
उन्होंने संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे बचपन से ही स्वाभिमानी थे। सात वर्ष की आयु में जब विद्यालय में अंग्रेजी रानी के जन्मदिन पर मिठाई दी गई, तो उन्होंने उसका विरोध करते हुए मिठाई फेंक दी। उन्होंने अपने जीवन के सभी सुख-सुविधाओं का त्याग कर राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की, जो आज एक विशाल वटवृक्ष के रूप में राष्ट्रहित में कार्य कर रहा है।
इतिहास के संदर्भ में डॉ. मोहंती ने कहा कि हिंदू समाज पर पहले मुगलों और बाद में अंग्रेजों ने आक्रमण किया, जिसका मुख्य कारण हिंदुओं में एकता का अभाव रहा। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को बांटने के प्रयास आज भी जारी हैं, इसलिए अब जागरण का समय आ गया है।
उन्होंने आह्वान किया कि भाषा, जाति और समुदाय के नाम पर आपसी संघर्ष छोड़कर सभी को हिंदू धर्म, मातृभूमि और मातृशक्ति की रक्षा के लिए एकजुट होना होगा।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेविका समिति की प्रांत प्रचारिका एवं अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख सुश्री सुप्रिया देवी ने अपने वक्तव्य में पंचकरण और जीवन के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दुष्टों का दमन, सज्जनों का संरक्षण और धर्म की रक्षा—यही जीवन का उद्देश्य है, जिसे व्यवहारिक जीवन में अपनाना होगा। इसके लिए स्वार्थ त्याग, परंपरा-संस्कृति का संरक्षण और स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग पर बल दिया।
कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं में सेवानिवृत्त शिक्षक अभिजीत चक्रवर्ती, आयोजन समिति के अध्यक्ष रंजीत देव राय, संताल समाज के प्रतिनिधि महादेव संताल, कुर्मी समाज से सुभाष कुर्मी, तंतुबाई समाज से बलराम तंतुबाई शामिल थे। सभी ने अपने संबोधन में हिंदू समाज को भेदभाव भूलकर एकजुट होने का संदेश दिया।
मंचासीन अतिथियों में बिमल देव, समाजसेवी मिथुन नाथ, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, हेमांग दास, वर्तमान विधायक मिहिर कांति सोम तथा प्रसेनजीत भट्टाचार्य सहित संघ के कार्यकर्ता और आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी हुईं, जिनमें बौ नृत्य, धामाइल, करम पूजा नृत्य, संताल नृत्य तथा बाल कलाकारों की प्रस्तुतियाँ शामिल रहीं। मनीषा सोम और अनिरुद्धा चक्रवर्ती के नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया।
इससे पूर्व सुबह नगर कीर्तन शालगंगा के प्रमुख मार्गों से होकर निकाला गया। इसके पश्चात भारत माता की पूजा की गई। मुख्य कार्यक्रम की शुरुआत “वंदे मातरम्” के सामूहिक गायन से हुई।
पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन आयोजन समिति के सचिव नबारुण चक्रवर्ती ने किया।





















