गुवाहाटी (असम), 02 मार्च । मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने कहा है की असम में एक जनांदोलन की जरूरत है। ऐसा आंदोलन जो असमिया जाति को सुदृढ़ बनाए। मुख्यमंत्री आज यहां एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि पहले हम जिस पर बरपेटा, मंगलदै, धुबड़ी, बंगाईगांव आदि के लिए हथियार उठा रहे थे, आंदोलन कर रहे थे आज वह स्थितियां नहीं हैं। आज असम एक अलग स्थान पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि बीते 25 वर्षों में असम का जिस तेजी से विकास हुआ है वह अपने आप में महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि हमें असमिया कौन का निर्धारण करने में भी अलग नजरिया रखना होगा। उन्होंने कहा कि यदि वर्षों से असम में रहने वाले हिंदी भाषियों, चाय बागान के लोगों या राज्य के जनजातीय लोगों को असमिया नहीं माना जाए तो यह संख्या 28 से 30 फ़ीसदी तक ही रह जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज असम बदल गया है। इसे यहां तक पहुंचाने में सभी का योगदान है।
उन्होंने कहा कि जिस असम की कल्पना को लेकर हथियार उठा लिया गया था, आज वह असम नहीं है। उन्होंने कहा कि एक समय था, जब इसके समाधान का कोई रास्ता नहीं देखा था, लेकिन बीते दो-तीन वर्षों में जिस प्रकार से राज्य में शांति स्थापित हुई है, इस शांति के कारण आज असम की तस्वीर ही बदल गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हथियार से किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता है। समस्या का समाधान भावना और विवेक के जरिए ही हो सकता है।
उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व में जो ऊंचा स्थान प्राप्त किया है, वह आंदोलन और हथियार के जरिए नहीं हुआ है, बल्कि इसके लोग सभी क्षेत्र में बेहतरीन काम किए हैं। ज्ञान, बुद्धि, कला, साहित्य, संस्कृति, विज्ञान आदि हर क्षेत्र में अपने आप को लोगों ने आगे बढ़ाया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने पहली बार असम विधानसभा में यह घोषणा की है कि असम की 105 विधानसभा सीटें असमिया लोगों को मिलेंगी। उन्होंने कहा कि निश्चित ही उन्होंने बराक घाटी के लोगों को भी असमिया के रूप में संबोधित किया है।
उन्होंने कहा कि किसी भी मुख्यमंत्री ने इसकी चिंता नहीं की। हर बार असमिया लोगों के हाथों से चार-पांच विधानसभा क्षेत्र निकल जाया करते थे। उन्होंने विज्ञान सम्मत तरीके से इसका चिंतन किया और इसके पुनर्निर्धारण का काम संपन्न किया।
उन्होंने कहा कि सीमाओं का पुनर्निर्धारण असम के इतिहास में नया अध्याय जोड़ेगा। वहीं, उन्होंने यह भी कहा कि उल्फा के साथ किया गया शांति समझौता इसे स्थायित्व प्रदान करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार किसी सरकार ने श्रीमंत शंकरदेव के जन्म स्थान बटद्रवा थान की चिंता की। यदि पहले से ही इस दिशा में पहल किया गया होता तो स्थितियां यहां तक नहीं पहुंचती। उन्होंने कहा कि सभी पहलुओं का विज्ञान सम्मत तरीके से विश्लेषण करते हुए समाधान का रास्ता निकाला गया है। मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि आज असमिया की लड़ाई हथियारों से नहीं बल्कि आत्मनिर्भर असम के लिए होनी चाहिए।



















