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3 जून/ इतिहासः भारत के विभाजन की योजना

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ब्रिटिश सरकार ने 20 फरवरी, 1947 को घोषणा की थी कि वह माह जून, 1948 तक भारत को स्वतंत्र कर देगी। इस घोषणा का तत्कालीन वायसराय लार्ड माउण्टबेटन पर इसके क्रियान्वयन का दबाव था ।
भारत को अंग्रेजी राज से स्वतंत्रता भले ही 15 अगस्त, 1947 को मिली हो, परन्तु 3 जून, 1947 को तत्कालीन वायसराय लार्ड माउंटबेटन ने भारत को दो राष्ट्रों में विभक्त करने की योजना की पेशकश की थी। मुस्लिम लीग ओर कांग्रेस के नेताओं के साथ लंबे विचार-विमर्थ के बाद माउंटबेटन ने इस योजना का प्रारूप प्रस्तुत किया। भारत के दिल की यह न सुनाई जाने वाली उदासी थी। यह घोषणा स्वतंत्रता के दीवानों के लिये आत्महत्या करने के समान थी। इस योजना में तीन बिंदुओं को सम्मिलित किया गयाः
1) भारत के बंटवारे के सिद्धांत को ब्रिटेन की संसद में पास करवाना ।
2) अस्थायी तौर पर बनने वाली सरकारों को अर्ध स्वायत राज्य व्यवस्था (डोमिनियल स्टेट) का दर्जा दिया जाये ।
3) भारत को ब्रिटिश राष्ट्रमंडल में रहने अथवा नहीं रहने का निर्णय स्वम् करना होगा ।
इसे थर्ड जून प्लान ओर बाद में माउंटबेटन योजना के नाम से जाना गया । इसी से ही भारत की स्वतंत्रता और पाकिस्तान के निर्माण का रोड-मैप तैयार हुआ। इसी दस्तावेज को भारत स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के रूप में ब्रिटेन से मान्यता मिली । इसी आधार पर भारत को ब्रिटेन के शासन से मुक्ति मिली और स्वराज स्थापित हुआ। साथ ही पाकिस्तान के रूप में भारत का एक बड़ा भूभाग दुर्भाग्य से भारत से अलग हुआ । इस द्विराष्ट्र सिद्धान्त व बंटवारे को रोकने के लिये केबिनेट मिशन भारत आया लेकिन वह भी कोई ठोस योजना बनाने में विफल रहा ।

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