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बांग्लादेश में हिंदू युवक को ज़िंदा जलाकर हत्या के विरोध में रामकृष्णनगर उबाल पर 

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बांग्लादेश में हिंदू युवक को ज़िंदा जलाकर हत्या के विरोध में रामकृष्णनगर उबाल पर
ईशानछड़ा से कदमतला तक पाँच किलोमीटर लंबा राजमार्ग बना जनआक्रोश का साक्षी
हीरक बनिक, रामकृष्णनगर, 28 दिसंबर
बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपु चंद्र दास को ज़िंदा जलाकर निर्मम हत्या किए जाने की घटना के विरोध में रविवार को रामकृष्णनगर सम-जिले के ईशानछड़ा से कदमतला तक जनआक्रोश फूट पड़ा। लगभग पाँच किलोमीटर लंबे इस राजमार्ग पर सैकड़ों लोगों की विशाल रैली निकली, जिससे पूरा इलाका आंदोलित हो उठा। भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे श्रीभूमि ज़िले में बीते कई दिनों से विभिन्न स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। उसी कड़ी में रविवार को सनातनी ऐक्य मंच के आह्वान पर आयोजित इस विशाल रैली ने जनसैलाब का रूप ले लिया। उल्लेखनीय है कि असम से लगभग 90 किलोमीटर दूर बांग्लादेश के मयमनसिंह ज़िले के बालुका क्षेत्र में हुई इस जघन्य हत्या ने पूरे सीमावर्ती इलाके में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर लगातार हो रहे अत्याचारों का हिस्सा है। सनातनी ऐक्य मंच के नेतृत्व में यह रैली श्रीभूमि और हैलाकांडी ज़िलों की सीमा स्थित ईशानछड़ा से शुरू हुई। रैली में सैकड़ों पुरुषों, महिलाओं और बच्चों ने भाग लिया।
“दीपु दास के हत्यारों को सज़ा दो”, “हिंदुओं की हत्या बंद करो”, “मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं चलेगा”— जैसे नारों से पूरा राजमार्ग गूंज उठा। रैली हैलाकांडी–रामकृष्णनगर पीडब्ल्यूडी सड़क होते हुए कदमतला तक पहुँची और अंत में कालीनगर बाज़ार में समाप्त हुई। वहाँ प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस का पुतला दहन कर अपना तीव्र आक्रोश प्रकट किया। इसके साथ ही सड़क पर बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज और मोहम्मद यूनुस की तस्वीर बनाकर उस पर पैर रखकर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया गया। रैली के समापन पर आयोजित एक संक्षिप्त सभा में वक्ताओं ने तीखे शब्दों में अपने विचार रखे। वक्ताओं का कहना था कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा गंभीर संकट में है और एक के बाद एक हत्या की घटनाओं के बावजूद प्रभावी कार्रवाई का अभाव साफ दिखाई देता है। वक्ताओं ने कहा, “किसी सभ्य राष्ट्र में यदि धर्म के आधार पर किसी व्यक्ति को ज़िंदा जला दिया जाए, तो यह केवल एक समुदाय पर नहीं, बल्कि पूरी मानवता पर हमला है।” वक्ताओं ने भारत सरकार से कूटनीतिक स्तर पर और अधिक कठोर रुख अपनाने की मांग की तथा बांग्लादेश सरकार को अंतरराष्ट्रीय मंच पर जवाबदेह ठहराने की अपील की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह आंदोलन अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ विश्व समुदाय का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से किया गया है। प्रदर्शन के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए रामकृष्णनगर पुलिस प्रशासन ने पहले से ही कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए थे। रैली और सभा स्थल पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा तथा पूरे इलाके में लगातार निगरानी रखी गई। अंततः यह विरोध कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। सीमावर्ती रामकृष्णनगर सम-जिले में हुई यह विशाल रैली स्पष्ट संकेत देती है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के विरुद्ध जनमत लगातार मज़बूत हो रहा है और इस मुद्दे पर अब आम लोग चुप रहने को तैयार नहीं हैं।

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