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क्यूं कि सिकरांत आयगी है.
अजी सुणो हो के
झिमली का बापूऊऊऊ ?
सिंकरात आयगी है,
पिछली बेर तो मं
पेट सूं थी,पण
पण ईबकी सिंकरात
जोर शोर सूं करस्यूं.
सोई आज तो तिल,गुड़,
काल चोखी सी कांबल,
अर गरम सुटर,
परस्यूं घेवर फिणी लाणी है.
अर परले दिन सुंवारे पेली
जल्दी उठकर कूंआ पर
न्हाणो है,अर गरम जलेबी
लाणी है.
थाने गरम सुटर पिन्हाऊंगी
बणा राखी हूं,
फेर सुत्या सुसरोजी न जगाऊंगी,
कांबल ऊढ़ाऊंगी,
थारे दोन्यूं बाप बेटा सूं
नोट कमाऊंगी.
भाणूड़ो आयोड़ो है
जलेबी अर रुपीया द्यूंगी,
देवर जी ने घेवर अर रुपीया,
आयोड़ा नणदोई जी भी है
बांका भी लाड़ लड़ाऊंगी
अर मोबिल फोन म्हारलो देऊंगी.
सगली चिंजा याद राखियो
हां ए पूरखिया की मां,
अर हां,
ईन्डो ईड फोन म्हारे तांई.
गर्म गुलगुला बणास्यूं
सगला तांई.
मं बोल्यो,दारु की बोतल ?
ले डांग म्हारे गेल्यां भागी
मं बचग्यो अर भाग्यो
क्यूं? क्यूंकि सिंकरात आयगी है।
मुरारी केडिया





















