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उधारबंद में बराक उपत्यका बंग साहित्य एवं संस्कृति सम्मेलन की नई क्षेत्रीय समिति का गठन

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उधारबंद में बराक उपत्यका बंग साहित्य एवं संस्कृति सम्मेलन की नई क्षेत्रीय समिति का गठन

उधारबंद, रविवार।
बराक उपत्यका बंग साहित्य एवं संस्कृति सम्मेलन की उधारबंद क्षेत्रीय समिति का गठन सत्र 1432–1434 (दो वर्षों) के लिए किया गया। इस अवसर पर रविवार को गुरुकुल इंग्लिश मीडियम हाई स्कूल में एक महत्वपूर्ण आमसभा का आयोजन किया गया, जिसमें 21 सदस्यीय नई कार्यकारिणी समिति का सर्वसम्मति से गठन किया गया।

सभा में भास्कर दास को अध्यक्ष तथा नुरुल हुदा लस्कर को सचिव निर्वाचित किया गया। अन्य पदाधिकारियों में सह-उपाध्यक्ष निहार कांति राय, सह-अध्यक्ष ऊषा रानी सिंह एवं शांतनु सेन, सह-सचिव (प्रशासनिक) किशोर भट्टाचार्य, सह-संपादिका मृण्मयी पुरकायस्थ, सांस्कृतिक संपादिका जया चक्रवर्ती, साहित्य संपादिका तानिया सुलताना बड़ा लस्कर, कोषाध्यक्ष अबुल हुसैन बड़ा भुइयाँ तथा लेखा परीक्षक बिजन बिहारी चक्रवर्ती शामिल हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत अध्यक्ष भास्कर दास द्वारा सम्मेलन का ध्वज फहराकर की गई। इसके बाद निवर्तमान सचिव निहार कांति राय ने संपादकीय प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जिस पर बिजन बिहारी चक्रवर्ती, तानिया सुलताना बड़ा लस्कर, मृण्मयी पुरकायस्थ, शांतनु सेन और ऊषा रानी सिंह ने अपने विचार रखे। सर्वसम्मति से संपादकीय प्रतिवेदन को स्वीकार किया गया।

कोषाध्यक्ष देवब्रत देव कानुनगो की अनुपस्थिति में अध्यक्ष द्वारा आय-व्यय का विवरण प्रस्तुत किया गया, जिसे ध्वनि मत से पारित किया गया।

केंद्रीय समिति के संगठन सचिव अनिल पाल ने अपने वक्तव्य में मातृभाषा को योजनाबद्ध तरीके से दबाने के प्रयासों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि बराक उपत्यका बंग सम्मेलन न केवल बंग भाषा और संस्कृति, बल्कि अन्य भाषाई समुदायों की मातृभाषा और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए भी संघर्षरत है। केंद्रीय समिति के पूर्व सदस्य अकमल अली बड़ा भुइयाँ ने भी सभा को संबोधित किया।

चुनाव पर्यवेक्षक अनिल कुमार पाल के निर्देश पर अध्यक्ष भास्कर दास ने पुरानी समिति के विघटन की घोषणा की। इसके बाद सभा का संचालन अकमल अली बड़ा भुइयाँ ने किया तथा निवर्तमान सचिव निहार कांति राय ने नई समिति की घोषणा की।

दूसरे सत्र में समाजसेवी सजल आचार्य और तापस दास उपस्थित हुए और सम्मेलन के कार्यों में सहयोग का आश्वासन दिया। सम्मेलन की ओर से सह-संपादिका मृण्मयी पुरकायस्थ ने उनका स्वागत किया।

इस अवसर पर उधारबंद के विधायक मिहिर कांति सोम का स्वागत केंद्रीय समिति के पूर्व सदस्य अकमल अली बड़ा भुइयाँ ने किया। विधायक सोम ने कहा कि सभी भाषाओं का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन मातृभाषा पर किसी भी प्रकार का आघात स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने भाषा आंदोलन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर भी प्रकाश डाला।

सांस्कृतिक कार्यक्रम में सम्मेलन की सदस्य दीपाली मजुमदार सहित अन्य कलाकारों ने संगीत प्रस्तुत किया, जबकि नटराज नृत्य संस्था के कलाकारों ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन सांस्कृतिक संपादिका जया चक्रवर्ती ने किया। इसके अलावा सुबीर आचार्य ने आवृत्ति पाठ किया।

कार्यक्रम के अंत में बराक उपत्यका के अविसंवादी नेता एवं केंद्रीय मंत्री रहे दिवंगत कविंद्र पुरकायस्थ को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उपस्थित सभी लोगों ने एक मिनट का मौन रखा।

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