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गौड़ीय मठ में 17 नंबर वार्ड का हिंदू सम्मेलन संपन्न

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गौड़ीय मठ में 17 नंबर वार्ड का हिंदू सम्मेलन संपन्न

विशेष प्रतिनिधि, शिलचर, 12 जनवरी:
राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित गौड़ीय मठ, 17 नंबर वार्ड में 11 जनवरी (रविवार) को भव्य हिंदू धर्म सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में वक्ताओं ने देशभक्ति, सामाजिक समरसता और हिंदू धर्म के व्यापक मानवीय मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

सम्मेलन के मुख्य अतिथि, संस्कार भारती दक्षिण असम प्रांत के प्रांत अध्यक्ष प्रसेनजीत राय चौधुरी ने कहा कि देश को वैभवशाली बनाने के लिए प्रत्येक नागरिक के मन में देशप्रेम का भाव होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में ‘धर्म’ का अर्थ अत्यंत व्यापक है—जिसमें सत्य बोलना, सन्मार्ग पर चलना, समाजसेवा करना और देश के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना शामिल है।

हिंदू धर्म सम्मेलन आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. अमृत लाल घोष ने अपने संबोधन में कहा कि लगभग 100 वर्ष पूर्व अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद ने हिंदू धर्म का विश्व मंच पर परिचय कराया। विवेकानंद की वाणी और दर्शन से हमें सभी को अपनाने और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।

सम्मेलन के अन्य वक्ता, गौड़ीय मठ के श्रीमद् स्वामी भक्तिवेदांत पद्मनाभ महाराज ने श्रीमद्भगवद्गीता के विभिन्न श्लोकों की व्याख्या करते हुए हिंदू धर्म की गहन विवेचना प्रस्तुत की।

राष्ट्र सेविका समिति की क्षेत्र कार्यवाहिका कृष्णा भट्टाचार्य ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर दिए गए ‘पंच परिवर्तन’ के आह्वान पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि पंच परिवर्तन में—

  1. सामाजिक समरसता,
  2. परिवार प्रबोधन,
  3. पर्यावरण संरक्षण,
  4. स्वदेशी जागरण और
  5. नागरिक अनुशासन—शामिल हैं।
    उन्होंने सामाजिक समरसता के तहत समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने, परिवार प्रबोधन के अंतर्गत पारिवारिक संवाद और आपसी निकटता बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण के लिए जल संरक्षण, वृक्षारोपण और प्लास्टिक के त्याग, स्वदेशी उत्पादों के उपयोग से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण तथा नागरिक अनुशासन के पालन पर विशेष जोर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और भारत माता पूजन के साथ किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति हुई, जिसमें अन्वेषा आचार्य, तापसी आचार्य, अनन्या साहा, त्रिपर्णा देव और जया आचार्य ने सहभागिता की। तबले पर अनिर्बान आचार्य ने संगत दी।

अंत में आयोजन समिति के सामान्य सचिव समर साहा ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन के साथ हुआ। समग्र कार्यक्रम का संचालन समिति सदस्य पार्थ देव ने किया।

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