श्रीहट्ट सम्मिलनी के 150वें स्थापना वर्ष का भव्य आयोजन
कोलकाता में 7–8 फरवरी, शिलचर में 19 मई को 11 शहीदों को श्रद्धांजलि
शिलचर, 12 जनवरी | रानू दत्त की रिपोर्ट
प्राचीन सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था ‘श्रीहट्ट सम्मिलनी’ के 150वें स्थापना वर्ष (सार्धशताब्दी) के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में भव्य आयोजन किए जाएंगे। इस क्रम में 7 और 8 फरवरी को कोलकाता में दो दिवसीय मुख्य कार्यक्रम आयोजित होगा, जबकि 19 मई को शिलचर सहित दिल्ली में भी विशेष श्रद्धांजलि एवं स्मृति कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सोमवार को शिलचर के इलोरा हेरिटेज में आयोजित एक पत्रकार सम्मेलन में यह जानकारी श्रीहट्ट सम्मिलनी, कोलकाता के अध्यक्ष सुबीर कर पुरकायस्थ ने दी। उन्होंने बताया कि 1876 में डॉ. सुंदरी मोहन दास, विपिन चंद्र पाल सहित कई विशिष्ट व्यक्तित्वों के प्रयास से ‘श्रीहट्ट सम्मिलनी’ की स्थापना हुई थी। यह संस्था बंगाल की सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं में से एक है।
उन्होंने कहा कि श्रीहट्ट सम्मिलनी का ग्राउंड ज़ीरो बराक घाटी है, जो सिलेटी मूल के लोगों से समृद्ध क्षेत्र है। बीते डेढ़ सौ वर्षों से यह संस्था श्रीहट्टी (सिलेटी) समुदाय की एकता, पहचान और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण हेतु निरंतर कार्य कर रही है। डॉ. सुंदरी मोहन दास, विपिन चंद्र पाल, तारकिशोर चौधरी (स्वामी संतदास बाबाजी) जैसे अनेक राष्ट्रप्रसिद्ध श्रीहट्टी व्यक्तित्व इस संस्था से जुड़े रहे हैं।
सार्धशताब्दी समारोह के तहत बराक घाटी में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए साधन पुरकायस्थ को संयोजक बनाकर एक एडहॉक कमेटी का गठन किया गया है।
19 मई को भाषा आंदोलन के 11 शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ-साथ एक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
पत्रकार सम्मेलन में अन्य वक्ताओं में साधन पुरकायस्थ, सार्धशताब्दी समारोह समिति के संयोजक निलोत्पल भट्टाचार्य, सौविक दास, सुनंदा नंदी पुरकायस्थ, हारान दे, प्रदीप दत्तराय, रूपम नंदी पुरकायस्थ, स्वर्णाली चौधरी, सुजन दत्त, रसराज दास, अतनु भट्टाचार्य, सिहाब उद्दीन, बलाइ देव सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।
यह समारोह न केवल संस्था के गौरवशाली इतिहास का स्मरण होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए संस्कृति, भाषा और सामाजिक एकता का संदेश भी देगा।





















