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एक विनम्र श्रद्धांजलि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता योगेंद्र सिन्हा विलक्षण व्यक्तित्व के धनी थे- दिलीप कुमार

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एक विनम्र श्रद्धांजलि

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता योगेंद्र सिन्हा विलक्षण व्यक्तित्व के धनी थे- दिलीप कुमार

समाज में कुछ लोग केवल अपने लिए या अपने परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज और देश के लिए जन्म लेते हैं। दिवंगत योगेन्द्र कुमार सिंह ऐसे ही विरल व्यक्तित्व थे। उनका जन्म 11 अक्टूबर 1941 को शिलचर के निकट तत्कालीन मासूघाट में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। छात्र जीवन से ही उन्होंने स्वयं को समाज और राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित कर दिया था।

मेरा और उनका संपर्क राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता के नाते हुआ था। संघ के कार्यक्रमों में उनके बौद्धिक बहुत ही रोचक और प्रेरणादायक होते थे। उनसे मिलने और बात करने से उत्साह वर्धन होता था। हमेशा प्रसन्न चित्त रहना उनका स्वभाव था। वे अपने पूरे परिवार सहित संगठन और समाज के कार्य में समर्पित थे।

योगेन्द्र कुमार सिंह उत्तर-पूर्व भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक अग्रणी नेता थे और दक्षिण असम के प्रांत बौद्धिक प्रमुख के रूप में उन्होंने असम, त्रिपुरा, मणिपुर और मिज़ोरम में संघ संगठन को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे भारतीय मजदूर संघ के भी सक्रिय नेता रहे और तीन वर्षों तक महत्वपूर्ण दायित्व का निर्वहन किया। पारिवारिक सुख-सुविधाओं की परवाह किए बिना उन्होंने अपना अमूल्य समय राष्ट्रसेवा को समर्पित किया।

1975 के आपातकाल के काले दौर में उन्होंने कारावास भी झेला। इसके सम्मानस्वरूप जनवरी 2022 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिल्ली में आपातकाल के दौरान कारावास झेलने वाले संघ नेताओं के सम्मान समारोह में उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया। 2024 में असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने भी उन्हें दिसपुर में सम्मानित किया तथा सरकारी पेंशन प्रदान की।
वे अयोध्या राम मंदिर आंदोलन में भी सक्रिय रहे और रामशिला पूजन का दायित्व निभाया। 2024 में नव-निर्मित राम मंदिर के उद्घाटन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित होकर वहाँ उपस्थित हुए।

2004 में भुवनेश्वर साधु ठाकुर आश्रम में बराक घाटी में आयोजित प्रथम सत्रह दिवसीय लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

प्रतिष्ठित कार्टूनिस्ट सपन सिन्हा लिखते हैं कि
विष्णुप्रिया मणिपुरी भाषा आंदोलन के पंचपांडवों के अंतिम पांडव व्यक्तित्सम्पन्न योगेन्द्र कुमार सिन्हा। 1960 के दशक में असम में विष्णुप्रिया मणिपुरी समाज के भीतर एक तीव्र नवजागरण की लहर उठी। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य था—शिक्षा के प्राथमिक स्तर पर विष्णुप्रिया मणिपुरी भाषा को सरकारी मान्यता दिलाना। यह आंदोलन आगे चलकर विष्णुप्रिया मणिपुरी आंदोलन परिषद के माध्यम से एक सशक्त लोकतांत्रिक जनआंदोलन बन गया। बराक घाटी में इस प्रखर भाषा आंदोलन का नेतृत्व जिन पाँच महान नेताओं ने किया, वे इतिहास में “पंचपांडव” के नाम से विख्यात हुए—
अग्निपुरुष गोपीनाथ सिंह, कुशोदज सिंह, योगेन्द्र कुमार सिंह, मनोरंजन सिंह और हेमकांति सिंह।
इन पंचपांडवों में योगेन्द्र कुमार सिंह और हेमकांति सिंह मासूघाट ग्राम के गौरवपूर्ण पुत्र थे, जिनका योगदान विष्णुप्रिया मणिपुरी भाषा आंदोलन में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। समय के साथ पंचपांडवों के सभी सदस्य दिवंगत हो गए और अंततः योगेन्द्र कुमार सिंह ही अंतिम जीवित पांडव थे।

7 जनवरी 2026 को 87 वर्ष की आयु में उन्होंने शिलचर के विवेकानंद रोड स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली। भाषा आंदोलन के वैचारिक मार्गदर्शक, प्रख्यात शिक्षाविद और समाजसेवी जगत मोहन सिंह के सान्निध्य में इन नेताओं ने कछार, श्रीभूमि और हाइलाकांदी के दूर-दराज़ के गांवों तक जाकर विष्णुप्रिया मणिपुरी समाज को जागरूक किया।

शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका योगदान अतुलनीय रहा। वे जगत मोहन सिंह के शिष्य थे और मासूघाट हाई स्कूल के संस्थापक प्रधानाचार्य रहे। कई वर्षों तक बिना वेतन के उन्होंने इस विद्यालय को खड़ा किया। उनके मार्गदर्शन में अनेक छात्र उच्च सरकारी पदों तक पहुँचे।

वे एक संस्कृतिप्रेमी, सशक्त लेखक, कवि, साहित्यकार, शोधकर्ता, इतिहासकार और नाटककार थे। विष्णुप्रिया मणिपुरी संस्कृति पर उनके शोधपरक लेख समाज के लिए अमूल्य धरोहर हैं। उनका कालजयी नाटक ‘आर बागन’ आज भी उतना ही लोकप्रिय है, जिसमें ब्रह्मदेशीय आक्रमण के समय मणिपुरियों के पलायन का जीवंत इतिहास प्रस्तुत किया गया है। जीवन के अंतिम क्षणों तक वे लेखन में सक्रिय रहे और एक के बाद एक महत्वपूर्ण पुस्तकों का प्रकाशन करते रहे। साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें असम सरकार से राज्य पेंशन भी प्राप्त हुई।

वे निखिल विष्णुप्रिया मणिपुरी संस्कृति परिषद के पूर्व अध्यक्ष तथा निखिल विष्णुप्रिया मणिपुरी महासभा के प्रमुख सलाहकार थे। वे एक ऐसे समाजसेवी थे जिनमें लेशमात्र भी अहंकार नहीं था। समाज और राष्ट्र की चिंता उनके जीवन का मूल उद्देश्य थी। उनका गहन पांडित्य उन्हें विष्णुप्रिया मणिपुरी समाज में सदैव जीवित रखेगा।

आज पूरा विष्णुप्रिया मणिपुरी समाज स्वयं को अनाथ अनुभव कर रहा है और बराक घाटी का संघ परिवार एक मार्गदर्शक से वंचित हो गया है।
योगेन्द्र कुमार सिंह समाज और राष्ट्रप्रेमियों के हृदय में सदैव अमर रहेंगे।

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