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आत्मकथा

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आत्मकथा
मैं हूँ स्वयं अपनी कहानी,
मेरी ही लिखी जिंदगानी।
जो कुछ भी हूँ, जैसी भी हूँ,
मैं अपनी ही पहचान हूँ।
मेरे हर पन्ने में बसा है
दर्द भी, खुशियाँ, संघर्ष अपार।
अनुभवों की स्याही से लिखी,
जीवन की सच्ची दरकार।
मेरे शब्दों में मेरी आत्मा,
हर भावना की गहरी छाया।
जो जिया, जो सहा, जो पाया,
सबने मुझे मुझसे मि लाया।
मैं हूँ स्वयं अपनी कहानी,
मेरी ही आवाज़, मेरी जुबानी।
हर मोड़, हर सच, हर एहसास—
यही है मेरी आत्मकथा अनजानी
नाम :- दीपाली सिंह

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