काछार कॉलेज में दो दिवसीय पाटचित्र कार्यशाला का शुभारंभ
पारंपरिक लोककला के संरक्षण व प्रसार की दिशा में नई पहल
शिलचर स्थित काछार कॉलेज शनिवार को एक समृद्ध सांस्कृतिक वातावरण का साक्षी बना, जहां दो दिवसीय पोटचित्र (पटचित्र) कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। यह कार्यशाला 18 जनवरी तक चलेगी। कार्यक्रम का आयोजन काछार कॉलेज के आईकेएस (Indian Knowledge System) सेल एवं ‘शिल्पांगन’ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है, जिसमें असम विश्वविद्यालय, शिलचर के सेंटर फॉर इंडियन नॉलेज सिस्टम (IKS) का सहयोग प्राप्त है।
इस कार्यशाला में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, कलाकारों और कला प्रेमियों की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिल रही है। दोनों दिन सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चलने वाली यह कार्यशाला पारंपरिक लोककला पोटचित्र के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कार्यशाला का मार्गदर्शन पश्चिम बंगाल के प्रख्यात पोटचित्र कलाकार सेरामुद्दीन चित्रकार कर रहे हैं। उद्घाटन सत्र में अपने संबोधन में उन्होंने कहा,
“इस कार्यशाला का हिस्सा बनकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। मैं प्रतिभागियों के साथ अपने ज्ञान और अनुभव को साझा करने का पूरा प्रयास करूंगा। भारतीय लोकसंस्कृति में पोटचित्र की गहरी जड़ें हैं और आज के समय में इसकी प्रासंगिकता पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी।”
कार्यक्रम में वक्ताओं ने पोटचित्र की उत्पत्ति, विषयवस्तु, कथा-वाचन शैली तथा चित्रांकन, संगीत और कथन के माध्यम से इसकी विशिष्टता पर प्रकाश डाला।
काछार कॉलेज के उपाध्यक्ष मोहम्मद शम्स उद्दीन ने कहा, “इस प्रकार की अर्थपूर्ण कार्यशाला से जुड़कर हमारा संस्थान गौरवान्वित महसूस कर रहा है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणाली और जीवंत कला रूपों से जोड़ते हैं।”
मुख्य अतिथि कछार कॉलेज प्रबंधन समिति के सदस्य प्रोफेसर अनुप कुमार दे ने लोककलाओं के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा,
“इन पारंपरिक कला रूपों में ही समाज की कहानियां, मूल्य और इतिहास समाहित हैं।”
कार्यक्रम में कॉलेज के सहायक प्राध्यापक डॉ. आनंद चंद्र घोष भी उपस्थित थे। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अप्रतिम नाग ने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा, “यह कार्यशाला एक सराहनीय पहल है। आईकेएस सेल के साथ सहयोग के लिए संदीपन दत्त पुरकायस्थ का आभार। भविष्य में भी छात्र-छात्राओं और समाज के हित में ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।”
‘शिल्पांगन’ के प्रमुख संदीपन दत्त पुरकायस्थ ने कहा,
“पारंपरिक कलाकारों और नई पीढ़ी के बीच सेतु बनाने के लिए हम आगे भी निरंतर प्रयास करते रहेंगे।”
कार्यशाला का उद्देश्य पोटचित्र के इतिहास और महत्व पर चर्चा के साथ-साथ प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना है, जिससे वे कलात्मक कौशल के साथ सांस्कृतिक दृष्टिकोण भी विकसित कर सकें। इस अवसर पर विशिष्ट चित्रकार विमलेंदु सिन्हा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।




















