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*व्यायाम ही नहीं, जीवन जीने की कला है सूर्य नमस्कार*
*विशाल झा/गुरुग्राम* :सामाजिक संस्था ऑल स्किल एंड रिसर्च फाउंडेशन, भारतीय योगिनी संघ व शक्ति योगशाला के संयुक्त तत्वावधान में सैक्टर 4 स्थित शिवा पार्क परिसर में सूर्य नमस्कार कार्यक्रम का आयोजन 26 जनवरी को प्रातः 6 से 8 किया जाएगा.
अध्यक्ष एमपी शर्मा का कहना है कि कार्यक्रम में समाज के सभी वर्गों से प्रतिभागी सूर्य नमस्कार का अभ्यास करेंगे। कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य लोगों को यह जागरूक करना है कि सूर्य भगवान उत्तरायण में प्रवेश कर चुके हैं, जिसके कारण मानव शरीर के मेटाबॉलिज्म में परिवर्तन आता है। ऐसे समय में सूर्य नमस्कार शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है। योग गुरु शालिनी भल्ला झांब ने का कहना है कि कार्यक्रम का एक अन्य उद्देश्य भारत सरकार के योग एवं सूर्य नमस्कार को जन-जन तक पहुँचाने के एजेंडा को लोकप्रिय बनाना भी है, ताकि लोग इसे अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल कर सकें।
*चार स्तंभों पर टिकी है साधना*
सूर्य नमस्कार की सार्थकता चार सिद्धांतों—शारीरिक, मानसिक, श्वसन और आध्यात्मिक—के समन्वय में है। इसे मात्र गिनती बढ़ाने या तेज़ गति से करना एक साधारण व्यायाम हो सकता है, लेकिन सही विधि, नियंत्रित श्वास-प्रश्वास और श्रद्धा भाव से किया गया अभ्यास ही जीवन को मर्यादित और संतुलित बनाता है।
*आधुनिक समस्याओं का प्राकृतिक समाधान*
आज के दौर में विटामिन-डी की कमी, कमजोर हड्डियाँ और गिरती इम्यूनिटी एक बड़ी चुनौती है। आधुनिक जीवनशैली ने हमें प्रकृति से दूर कर दिया है। इसी कमी को दूर करने के लिए सरकार ने 12 जनवरी से 12 फरवरी तक की अवधि को ‘सूर्य नमस्कार अभ्यास काल’ घोषित किया है। यह समय बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी के लिए स्वास्थ्य और संस्कार संवर्धन का स्वर्णिम अवसर है।
*माघ मास और योग का महत्व*
योग साधना के लिए माघ मास को अत्यंत अनुकूल माना गया है। शीत ऋतु के इस समय में सूर्य नमस्कार न केवल शरीर में ऊष्मा पैदा करता है और पाचन तंत्र को सुधारता है, बल्कि जोड़ों की अकड़न दूर कर मानसिक तनाव और आलस्य से भी मुक्ति दिलाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह इड़ा-पिंगला नाड़ियों को शुद्ध कर एकाग्रता बढ़ाता है।




















