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क्यों कानों को ठंड से बचाना फैशन नहीं, जीवन-रक्षा है?
जानिए 10 चौंकाने वाले सच, जो हर किसी को पता होने चाहिए!सर्दी आते ही हम जैकेट
, स्वेटर और दस्ताने
तो पहन लेते हैं…
, स्वेटर और दस्ताने
तो पहन लेते हैं…लेकिन कानों को खुला छोड़ देना हमारी सबसे बड़ी गलती होती है!
क्या आप जानते हैं?कान सिर्फ सुनने का अंग नहीं, बल्कि शरीर के तापमान और नर्व सिस्टम का “सेंसेटिव सेंटर” हैं।
यही वजह है कि डॉक्टर और आयुर्वेद — दोनों कान ढकने पर ज़ोर देते हैं।
कान क्यों हैं सबसे ज्यादा संवेदनशील?कानों में न तो मोटी त्वचा होती है, न फैट की परत।
ठंडी हवा सीधे नसों और ब्रेन सिग्नल्स को प्रभावित करती है —
और यहीं से शुरू होती हैं कई खामोश बीमारियाँ 

10 चौंकाने वाले लेकिन सच्चे तथ्य
दिमाग से सीधा कनेक्शनकान के पीछे मौजूद Vagus Nerve पर ठंड पड़ते ही चक्कर और सिरदर्द हो सकता है 

कान में हड्डी बढ़नालगातार ठंड लगने से Surfer’s Ear — सुनने की क्षमता कम हो सकती है 

चेहरे का लकवा (Bell’s Palsy)कड़ाके की ठंड में चेहरे की नस प्रभावित हो सकती है 

पेट से सीधा संबंधआयुर्वेद मानता है — कान ठंडे, तो गैस और अपच तय 

ब्लड प्रेशर अचानक बढ़नाकान ठंडे → नसें सिकुड़ी → BP 10-15 पॉइंट ऊपर 

संतुलन बिगड़नाInner Ear का तरल प्रभावित → चलते समय लड़खड़ाहट 

दांतों का झूठा दर्दअसल में दर्द कान की नसों से आ रहा होता है 

इम्युनिटी कमजोर होनाशरीर ऊर्जा बचाने में लग जाता है, बीमारी पकड़ लेती है 

कान का वैक्स सख्त होनाखुजली, संक्रमण और जलन का खतरा 

बिना वजह घबराहटठंडी हवा नर्वस सिस्टम को ओवर-एक्टिव कर देती है 

सिर्फ 3 आसान बचाव उपाय
मफलर/मंकी कैप — कान पूरी तरह ढकें
तेज़ हवा में हल्की रुई
तिल या बादाम तेल — नहाने के बाद कान के पीछे
याद रखें
कान शरीर की “खिड़कियाँ” हैंअगर ठंडी हवा अंदर जाएगी —
तो पूरा शरीर प्रभावित होगा।
इस सर्दी स्टाइल के साथ सेहत भी बचाइए 

कान ज़रूर ढकिए!
यह जानकारी अपनों के साथ ज़रूर शेयर करें#WinterCare #HealthAwareness #EarCare #सर्दी #HealthTips




















