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प्रयागराज माघ मेले में धामाइल, बिहु और ओझा नृत्य ने बटोरी सराहना

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प्रयागराज माघ मेले में धामाइल, बिहु और ओझा नृत्य ने बटोरी सराहना

प्रयागराज, 25 जनवरी: अन्य वर्षों की भांति इस वर्ष भी संस्कार भारती के तत्वावधान में प्रयागराज महानगर में माघ मेला–2026 का भव्य आयोजन किया गया। यह सांस्कृतिक उत्सव 19 जनवरी से प्रारंभ होकर 29 जनवरी तक चलेगा। आयोजकों के अनुसार, प्रत्येक नागरिक के भीतर भारतीय संस्कृति और मूल्यों के प्रति आत्मीयता का भाव जाग्रत करने के उद्देश्य से संस्कार भारती द्वारा प्रतिवर्ष माघ मेले का आयोजन किया जाता है।

इस वर्ष माघ मेले में संविधान के 75 वर्षवंदे मातरम् के 150 वर्षधरती आबा बिरसा मुंडा जयंती तथा संघ शताब्दी वर्ष जैसे विषयों पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनी, कार्यशालाएँ एवं शोभायात्राएँ आयोजित की गई हैं। माघ मेले का शुभ उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया।

संस्कार भारती दक्षिण असम प्रांत के सचिव विश्वतोष देव एवं शिलचर यूथ क्वायर के सचिव तथा प्रख्यात तबला वादक संतोष चंद के नेतृत्व में बराक घाटी से एक विशाल सांस्कृतिक दल ने 20, 21 और 22 जनवरी को माघ मेले में सहभागिता की। इस दल में बदरपुर के नृत्य गुरु ब्रजेंद्र सिन्हा के नेतृत्व में 25 सदस्यीय नृत्य समूह शामिल था, जिन्होंने मणिपुरी नृत्य शैली में कृष्ण की माखन चोरीदशावतारयुगल नर्तनकृष्ण नर्तनबकासुर वध तथा मणिपुरी लोकनृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की भरपूर प्रशंसा प्राप्त की।

वहीं शिलचर से नृत्य शिक्षिका गायत्री देवी एवं अधिवक्ता सोनाली दे के निर्देशन में नृत्यांजलि सांस्कृतिक संस्था और शिलचर यूथ क्वायर के कलाकारों ने 11 सदस्यीय दल के साथ बराक का पारंपरिक धामाइल नृत्य, असम का बिहुमनसा मंगल पर आधारित ओझा नृत्य, बंगाल का पारंपरिक गाजन लोकनृत्य‘अभिमन्यु वध’ नृत्यनाट्य तथा संविधान 75 विषयक प्रस्तुति दी। उत्तर प्रदेश में बंगाल की लोकनृत्य परंपराओं को विशेष रूप से सराहा गया। देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों के बीच बराक घाटी के कलाकारों ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई।

कार्यक्रम में साथी विश्वास, श्रुति विश्वास, सूर्यतपा देव, तनुश्री पाल, वैशाली पाल, सुमिता चक्रवर्ती, गायत्री देवी और सोनाली दे ने नृत्य प्रस्तुत किया।

शिलचर यूथ क्वायर के सचिव संतोष चंद ने बताया कि संस्था वर्ष 2002 से बंगाल की पारंपरिक लोकसंस्कृति—विशेष रूप से धामाइल नृत्य और ओझा नृत्य—के प्रचार-प्रसार के लिए देश के विभिन्न राज्यों में निरंतर कार्य कर रही है और अब तक अनेक मंचों पर बराक की सांस्कृतिक पहचान स्थापित कर चुकी है।

संस्कार भारती के सांस्कृतिक संगठक विश्वतोष देव ने कहा कि संस्था देश के प्रत्येक समुदाय की संस्कृति को सामने लाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। वहीं नृत्यांजलि सांस्कृतिक संस्था की सचिव सोनाली दे ने कहा कि बराक की लोकसंस्कृति को देश-विदेश तक पहुँचाने का प्रयास भविष्य में भी जारी रहेगा।

संस्कार भारती काशी प्रांत के संगठन सचिव दीपक शर्मा ने बताया कि इस माघ मेले में देश की विविध क्रीड़ा-संस्कृति के साथ-साथ असम और बराक घाटी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया।

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