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असामाजिक शक्तियां हिंदू धर्म पर प्रहार कर रही हैं- भैय्याजी जोशी 

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असामाजिक शक्तियां हिंदू धर्म पर प्रहार कर रही हैं- भैय्याजी जोशी 
उधारबंद में आरएसएस शताब्दी वर्ष पर मंडल स्तरीय हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन
उधारबंद, निहार कांति राय, 28 जनवरी:
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में उधारबंद श्री श्री कांचा कांति माता मंदिर प्रांगण में उधारबंद मंडल जीपी आधारित हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। सम्मेलन की शुरुआत गायत्री यज्ञ के साथ हुई, जिसके पश्चात भारत माता की पूजा संपन्न हुई।
भारत माता पूजन के बाद धामाइल नृत्य एवं मणिपुरी नृत्य प्रस्तुत किए गए, जिसने कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भर दिया। वहीं देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति अनुराधा भट्टाचार्य और सीमा पासी ने दी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
इसके बाद बौद्धिक सत्र का आयोजन किया गया। उधारबंद मंडल जीपी आधारित हिंदू सम्मेलन आयोजन समिति के अध्यक्ष सोमनाथ देव की अध्यक्षता में आयोजित इस सभा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह भैयाजी जोशी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि “हिंदू धर्म विश्व का सनातन धर्म है। यदि हिंदू धर्म नष्ट हो गया तो विश्व में कोई भी धर्म शेष नहीं रहेगा।”
भैयाजी जोशी ने कहा कि हिंदू धर्म का इतिहास अत्यंत प्राचीन है और इसमें श्रद्धा, प्रेम, करुणा और मानवता जैसे उच्चतम मूल्य निहित हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज भाषा, क्षेत्र, जाति और संप्रदाय के नाम पर हिंदू समाज विभाजित हो रहा है, जिसका लाभ उठाकर असामाजिक शक्तियां हिंदू धर्म पर प्रहार कर रही हैं। हिंदू धर्म आज अस्तित्व के संकट से गुजर रहा है। उन्होंने आह्वान किया कि हिंदू धर्म की रक्षा के लिए समाज को सभी प्रकार के भेदभाव भूलकर एकजुट होना होगा। देश को विश्वगुरु के आसन पर स्थापित करने के लिए हिंदू धर्म का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
इस अवसर पर राष्ट्रीय सेविका समिति, दक्षिण असम प्रांत की बौद्धिक प्रमुख अधिवक्ता मुक्ता दास ने भी बौद्धिक प्रदान किया। उन्होंने सामाजिक समरसता, पंच परिवर्तन और आत्मबोध के निर्माण में नारी शक्ति की भूमिका और दायित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महिलाओं में स्वदेशी भावना और आत्मबोध जगाना आवश्यक है तथा भाषा, वेशभूषा और संस्कृति को सम्मान देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं का आचरण, खान-पान और जीवनशैली ऐसी होनी चाहिए जिससे समाज प्रेरणा ले सके।
अधिवक्ता दास ने पंच परिवर्तन के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण पर बल देते हुए कहा कि केवल वृक्षारोपण ही नहीं, बल्कि लगाए गए पौधों की देखभाल भी उतनी ही आवश्यक है।
कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद उधारबंद के संस्थापक रंजीत कुमार चौधुरी, सुस्मिता दुबे तथा वरिष्ठ नागरिक राजमोहन सिंह मंचासीन थे। प्रारंभिक वक्तव्य आयोजन समिति के अध्यक्ष सोमनाथ देव ने दिया।
सम्मेलन के समापन सत्र में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देने वाले कलाकारों को मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। अंत में मनोज भट्टाचार्य द्वारा संकल्प पाठ कराया गया और ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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