“शिक्षा सेतु” ऐप से जुड़ी खबरों पर शिक्षिका सागरिका नाथ ने रखी अपनी बात
गौतम सरकार, शनबिल | 31 जनवरी
रामकृष्णनगर शिक्षा खंड के अंतर्गत 1292 नंबर हरेंद्र नाथ एल.पी. स्कूल की सहायक शिक्षिका सागरिका नाथ पर “शिक्षा सेतु” ऐप को हैक कर विद्यालय जाए बिना घर बैठे उपस्थिति दर्ज कराने के आरोपों को लेकर विभिन्न न्यूज़ चैनलों और समाचार पत्रों में जो खबरें प्रकाशित हुई हैं, उन पर शिक्षिका ने शुक्रवार को पत्रकारों के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट की।
सागरिका नाथ ने कहा कि उन्हें इस प्रकार के आरोपों की जानकारी समाचार चैनल देखने के बाद ही मिली, जिससे वे अत्यंत दुखी और मानसिक रूप से आहत हैं। उन्होंने कहा, “मेरे बारे में जो वीडियो और खबरें प्रसारित हुई हैं, उनमें कितना सत्य है और कितना असत्य, यह मैं स्वयं भी नहीं जानती।”
उन्होंने बताया कि वे 1 अगस्त को हरेंद्र नाथ एल.पी. स्कूल में कार्यभार ग्रहण करती हैं और वर्तमान में वे सात माह की गर्भवती हैं। चिकित्सकों की सलाह के अनुसार उन्हें अधिक यात्रा करने से मना किया गया है। इसी कारण उन्होंने अपने मायके से विद्यालय आने-जाने में असुविधा को देखते हुए ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) और श्रीभूमि जिला शिक्षा विभाग से अनुरोध कर चार माह की रिलीफ (छूट) ली थी, जो 31 जनवरी तक मान्य है।
सागरिका नाथ ने स्पष्ट किया कि इसके बावजूद वे नियमित रूप से विद्यालय जाती रही हैं और उपस्थिति रजिस्टर (हाजिरी खाता) में स्वयं हस्ताक्षर करती रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि गणतंत्र दिवस के दिन वे विद्यालय में उपस्थित थीं, जहां प्रधानाध्यापक की मौजूदगी में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया।
उन्होंने कहा कि कुछ समाचारों में यह दिखाया गया कि वे घर बैठे ड्यूटी कर रही हैं और उपस्थिति दे रही हैं, जबकि यह पूरी तरह गलत है।
उनके अनुसार, एक दिन उपस्थिति देने के बाद विद्यालय के प्रधानाध्यापक दीपक रंजन देवनाथ ने उन्हें बताया कि उनकी उपस्थिति उनके विद्यालय की बजाय किसी अन्य विद्यालय (बरूआला स्कूल) में दर्ज हो रही है। इस पर वे स्वयं तुरंत ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के पास गईं और पूरे मामले से अवगत कराया।
बीईओ ने प्रारंभिक रूप से इसे मोबाइल लॉग-इन/नेटवर्क समस्या बताया और कहा कि तकनीकी त्रुटि के कारण ऐसा हो सकता है। बाद में विद्यालय में बीईओ के उपस्थित होने पर उनके मोबाइल की सेटिंग ठीक करवाई गई और लॉग-आउट करने की सलाह दी गई।
सागरिका नाथ ने यह भी कहा कि कुछ लोगों द्वारा यह बयान दिया गया कि वे पिछले तीन महीनों से विद्यालय में नहीं आ रही थीं, जो पूरी तरह असत्य है। उनके पास 31 जनवरी तक की सभी उपस्थिति से संबंधित कागजात और मेडिकल रिपोर्ट मौजूद हैं, जिन्हें देखकर अधिकारियों ने पहले भी उन्हें सहयोग दिया था।
अंत में उन्होंने ब्लॉक शिक्षा अधिकारी एवं श्रीभूमि जिला शिक्षा अधिकारी से अनुरोध किया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए, ताकि उन्हें और उनके परिवार को मानसिक प्रताड़ना से राहत मिल सके।




















