रामकृष्णनगर में खुदरा सिक्कों की समस्या से व्यापारी और आम लोग परेशान
गौतम सरकार, शनबिल | 5 फरवरी :
एक समय था जब खुदरा पैसे—एक रुपये, दो रुपये या पचास पैसे—आम लोगों और व्यापारियों के लिए अमूल्य संपत्ति हुआ करते थे। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोग इन सिक्कों को मिट्टी के बर्तन या रसोईघर के बांस के कूटों में सुरक्षित रखते थे और आवश्यकता पड़ने पर उपयोग में लाते थे।
लेकिन बीते कुछ वर्षों में स्थिति पूरी तरह बदल गई है। अब वही खुदरा सिक्के आम जनता और व्यापारियों के लिए बोझ बनते जा रहे हैं। बाजार में एक रुपये, दो रुपये और पचास पैसे के सिक्कों की मांग लगातार घट रही है, यहां तक कि कई स्थानों पर ये लगभग अचल हो चुके हैं।
ग्राहक जब बाजार में इन सिक्कों के साथ भुगतान करने पहुंचते हैं, तो कई व्यापारी उन्हें लेने से साफ इनकार कर देते हैं। यह समस्या दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। रामकृष्णनगर के कुछ व्यापारियों का कहना है कि वे ग्राहकों से खुदरा सिक्के तो ले लेते हैं, लेकिन जब उन्हें बड़े थोक व्यापारियों या मालिकों को भुगतान करना होता है, तो वहां ये सिक्के स्वीकार नहीं किए जाते। उन्हें साफ शब्दों में कहा जाता है कि “यहां ये सिक्के नहीं चलेंगे, कहीं और दें।”
इस कारण आए दिन बाजारों में ग्राहकों और दुकानदारों के बीच खुदरा पैसों को लेकर तीखी बहस और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है। यह समस्या केवल रामकृष्णनगर तक सीमित नहीं है, बल्कि बराक घाटी के विभिन्न इलाकों में आम लोग इस परेशानी से जूझ रहे हैं।
रामकृष्णनगर विधानसभा क्षेत्र के कई इलाकों में जहां 10 रुपये के सिक्के प्रचलन में हैं, वहीं शिलचर शहर में स्थिति और भी गंभीर है। शिलचर में एक रुपये, दो रुपये और यहां तक कि 10 रुपये के सिक्के भी कई व्यापारी स्वीकार नहीं कर रहे हैं। बाहर से आने वाले लोगों को वहां भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।
इस गंभीर समस्या को देखते हुए रामकृष्णनगर विधानसभा क्षेत्र के आम नागरिकों ने श्रीभूमि जिले के जिलाधिकारी प्रदीप कुमार द्विवेदी का ध्यान आकर्षित किया है और मांग की है कि खुदरा सिक्कों की इस समस्या का शीघ्र समाधान निकाला जाए, ताकि आम जनता और व्यापारियों को राहत मिल सके।



















