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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय चांदमारी, शिलचर केंद्र में महाशिवरात्रि पर अनूठी शिव आराधना

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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय चांदमारी, शिलचर केंद्र में महाशिवरात्रि पर अनूठी शिव आराधना
शिलचर, प्रेरणा संवाददाता।
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर चांदमारी स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय केंद्र में भक्ति, सृजन और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। केंद्र में कागज से द्वादश ज्योतिर्लिंग की आकर्षक प्रतिकृतियां तैयार की गईं तथा भगवान शिव की विशेष आराधना एवं ध्यान-साधना का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण सब्जियों से निर्मित विशाल शिवलिंग रहा, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। फूलगोभी, पत्ता गोभी, गाजर, सेम और बैंगन से शिवलिंग का आकार दिया गया, जबकि आलू, राजमा और मटर की मालाओं से उसे सजाया गया। कोहड़ा (कद्दू) से चंद्रमा की आकृति बनाकर शिवलिंग को दिव्य रूप प्रदान किया गया। रंग-बिरंगे फूलों की सजावट ने वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया।
इस अवसर पर आध्यात्मिक चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें “आत्मा और शरीर”, “तीन संसार”, “सर्व आत्माओं के परमपिता”, “शिवरात्रि का आध्यात्मिक रहस्य” तथा भगवान शिव को ज्योति बिंदु स्वरूप में दर्शाया गया। प्रदर्शनी के माध्यम से राजयोग ध्यान और आत्म-परिवर्तन का संदेश दिया गया।
केंद्र के ऊपरी तल पर स्थित साधना कक्ष का दिव्य वातावरण श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। कक्ष में फूस और बांस से निर्मित कुटिया बनाई गई है, जिसके मध्य में प्रवचन हेतु व्यासपीठ तथा एक ओर शांति स्तंभ स्थापित है। साधकों के लिए सुव्यवस्थित बैठने की व्यवस्था की गई थी, जहां सामूहिक ध्यान सत्र संपन्न हुआ।
केंद्र की प्रमुख बी.के. भवानी दीदी के मार्गदर्शन में कार्यक्रम का सफल संचालन किया गया। उनके सहयोगियों में बंटी दीदी, विश्वजीत भैया, आरती दीदी एवं रुपाली दीदी सक्रिय रूप से व्यवस्थाओं में जुटे रहे।
संस्था का परिचय
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय एक अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक एवं सामाजिक सेवा संस्था है, जिसकी स्थापना वर्ष 1937 में सिंध (अब पाकिस्तान) में लेखराज कृपलानी (ब्रह्मा बाबा) द्वारा की गई थी। इसका मुख्यालय माउंट आबू (राजस्थान) में स्थित है। संस्था राजयोग ध्यान के माध्यम से आत्मिक शांति, नैतिक मूल्यों और व्यक्तित्व विकास पर बल देती है।
संस्था का उद्देश्य आत्म-परिवर्तन के माध्यम से विश्व-परिवर्तन लाना है। ब्रह्माकुमारी संगठन में महिलाओं की प्रमुख भूमिका है और अधिकांश प्रशासनिक जिम्मेदारियां बहनों के हाथों में हैं। विश्व के 140 से अधिक देशों में हजारों सेवा केंद्रों के माध्यम से यह संस्था आध्यात्मिक, सामाजिक और मानव सेवा के कार्य कर रही है।
संस्था को संयुक्त राष्ट्र संघ से परामर्शदाता का दर्जा भी प्राप्त है।
महाशिवरात्रि के इस आयोजन ने शिलचर के श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता से भर दिया।

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