बड़ी खबर: चाय बागान श्रमिकों को भूमि अधिकार देने के असम सरकार के फैसले को हाईकोर्ट की मंजूरी

एजेंसी संवाददाता गुवाहाटी, 14 फरवरी:
गुवाहाटी से बड़ी खबर सामने आई है। गौहाटी हाईकोर्ट ने चाय बागान श्रमिकों को भूमि स्वामित्व अधिकार देने के राज्य सरकार के निर्णय को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है। अदालत ने इस फैसले पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है।
यह मामला चाय उद्योग की प्रमुख संस्था इंडियन टी एसोसिएशन द्वारा दाखिल याचिका के बाद अदालत में पहुंचा था। संस्था ने सरकार द्वारा पारित संशोधित कानून का विरोध करते हुए कहा था कि इससे चाय बागानों की संरचना और उत्पादन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
अदालत में क्या हुआ
4 फरवरी को इस मामले की सुनवाई हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें पेश कीं। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता देवजीत सैकिया ने बताया कि अदालत ने इस योजना को राज्य की जनकल्याण नीति का हिस्सा माना और सरकार को प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दी।
श्रमिकों को मिलेगा जमीन का मालिकाना हक
सरकार की योजना के तहत चाय बागानों के ‘लेबर लाइनों’ में रहने वाले श्रमिकों को मात्र 500 रुपये प्रति बीघा के भुगतान पर जमीन का स्वामित्व दिया जाएगा।
असम में लगभग 850 चाय बागान हैं, जिनमें से 707 बागानों में श्रमिक आवास (लेबर लाइन) मौजूद हैं। पीढ़ियों से इन श्रमिक परिवारों के पास रहने की जमीन का कोई कानूनी अधिकार नहीं था।
ऐतिहासिक सुधार की दिशा में कदम
राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद विधानसभा ने असम फिक्सेशन ऑफ सीलिंग ऑफ लैंड होल्डिंग (संशोधन) अधिनियम, 2025 पारित किया था, जिससे श्रमिकों को आवासीय भूमि का मालिकाना हक देने का रास्ता साफ हुआ।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि यह कदम उन श्रमिकों के साथ हुए “ऐतिहासिक अन्याय” को सुधारने का प्रयास है, जो औपनिवेशिक काल से लगभग 200 वर्षों से चाय बागानों में काम कर रहे हैं।





















