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Shivaratri 2026 Jal Abhishek: जल चढ़ाते समय ये 5 गलतियां पड़ सकती हैं भारी, जानें क्या कहती है काशी की परंपरा?

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Shivaratri 2026 Jal Abhishek: महाशिवरात्रि पर जल चढ़ाते समय पात्र, दिशा और विधि का ध्यान रखना जरूरी है. जल्दबाज़ी या दिखावे से बचें. सच्चे मन और संयम के साथ किया गया जलाभिषेक ही शिव कृपा का मार्ग खोलता है.
Shivaratri 2026 Jal Abhishek: महाशिवरात्रि आते ही देशभर के मंदिरों में “हर-हर महादेव” की गूंज सुनाई देने लगती है. रात भर जागरण, कतारों में खड़े श्रद्धालु, हाथों में जल का लोटा और मन में एक ही भावना-भोलेनाथ की कृपा मिल जाए, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस जलाभिषेक को हम बड़े विश्वास से करते हैं, उसकी सही विधि क्या है? कई बार जल्दबाज़ी, अधूरी जानकारी या भीड़ के दबाव में हम ऐसी छोटी-छोटी भूलें कर बैठते हैं, जिन पर ध्यान ही नहीं जाता. मान्यता है कि शिव सरल हैं, पर साधना में अनुशासन भी उतना ही जरूरी है. ऐसे में यह समझना अहम हो जाता है कि जल चढ़ाने का सही तरीका क्या है, किस दिशा में बैठना चाहिए, किस पात्र का इस्तेमाल करना चाहिए और किन गलतियों से बचना चाहिए.
जलाभिषेक केवल परंपरा नहीं, एक साधना
महाशिवरात्रि सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का दिन माना जाता है. शिव को संहारक भी कहा गया है और करुणा का सागर भी. यही वजह है कि उनका पूजन बाहरी दिखावे से ज्यादा भीतर की भावना से जुड़ा है. काशी की परंपरा और शिव पुराण में जलाभिषेक को विशेष महत्व दिया गया है. माना जाता है कि सही विधि से किया गया अभिषेक मन को स्थिर करता है और साधक को संयम सिखाता है.

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