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शिलचर के भोलागिरि आश्रम में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया शिवचतुर्दशी एवं पारण उत्सव

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शिलचर के भोलागिरि आश्रम में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया शिवचतुर्दशी एवं पारण उत्सव

। शहर के रांगिरखाड़ी स्थित श्रीश्री भोलागिरि आश्रम में प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी दो दिवसीय शिवचतुर्दशी एवं पारण उत्सव पारंपरिक सनातन धार्मिक विधि-विधानों के साथ श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ। उत्सव में क्षेत्रभर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया।

रविवार संध्या से ही आश्रम परिसर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। शिवचतुर्दशी के अवसर पर आश्रम के शिवलिंग, नंदी महाराज एवं पूज्य भोलानंद गिरि महाराज के चरणों में श्रद्धालुओं ने दूध, घी, मधु एवं बेलपत्र अर्पित कर अभिषेक किया। रात्रि में चार प्रहर विशेष शिवपूजन एवं रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया, जिससे संपूर्ण आश्रम परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो उठा।

सोमवार प्रातः उपवास रखने वाले श्रद्धालुओं ने विधिपूर्वक पारण कर उत्सव में सहभागिता की। इस अवसर पर काशी भोलानंद गिरि आश्रम के अधिष्ठाता आचार्य स्वामी माधवानंद गिरि महाराज ने कहा कि शिलचर का भोलागिरि आश्रम वर्षों से इस क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना का प्रसार कर रहा है। शिवरात्रि के दिन यहां प्रतिवर्ष अपार श्रद्धालुओं का समागम होता है। उन्होंने आश्रम के लिए प्रस्तावित नए भवन—जिसमें सत्संग भवन एवं साधु निवास का निर्माण किया जाएगा—के लिए धर्मप्रेमी भक्तों से सहयोग की अपील की।

श्रीमद् स्वामी चैतन्यानंद गिरि महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि शिवरात्रि की पावन रात्रि में भगवान शिव प्रथम बार शिवलिंग रूप में प्रकट हुए, जो सृष्टि, पालन और संहार के प्रतीक हैं। इसी दिन माता पार्वती के साथ उनका दिव्य विवाह भी संपन्न हुआ। उन्होंने त्रिपांतक नामक शिकारी की कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि अनजाने में शिवरात्रि व्रत का पालन करने से भी मोक्ष की प्राप्ति संभव है।

काशी से पधारे आचार्य श्रीमद् स्वामी अनघानंद पुरी महाराज ने कहा कि सच्ची भक्ति और अहंकाररहित निस्वार्थ सेवा ही ईश्वर को प्रिय है। अहंकार व्यक्ति को आध्यात्मिक मार्ग से भटका देता है, जबकि शुद्ध एवं विनम्र भक्ति से ही ईश्वर की अनुभूति संभव है। उन्होंने आयोजन समिति के सदस्यों एवं समस्त श्रद्धालुओं को सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।

आश्रम के अधिष्ठाता स्वामी भुवनेश्वरानंद गिरि महाराज ने कहा कि श्रद्धा एवं नियमपूर्वक शिवचतुर्दशी व्रत का पालन करने से जीवन में शांति, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है तथा शिवकृपा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

उत्सव के सफल आयोजन में काशी से पधारे पंडित राजू आरिया सहित पंकज दे, सौरभ चंद, सौमेन दत्त चौधरी, भोलनाथ चौधरी, सुषांत सेन, शंकर दास, वेदव्रत राय और संतोष राय सहित अन्य श्रद्धालुओं ने सहयोग दिया। भक्ति संगीत की प्रस्तुति में आशीष राय, रीता नाथ एवं अन्य कलाकारों ने वातावरण को भावविभोर कर दिया।

 

सोमवार को इस अवसर पर लगभग तीन हजार श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। आयोजन के दौरान पूरा आश्रम परिसर “हर हर महादेव” के जयघोष से गूंजता रहा।

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