लुंखाओ गांव, मणिपुर में असम राइफल्स ने स्वतंत्रता सेनानी की 33वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की
असम राइफल्स ने 17 फरवरी 2026 को मणिपुर के लुंखाओ पार्ट–I गांव में भारत की महान स्वतंत्रता सेनानी की 33वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर वीरांगना के अदम्य साहस, त्याग और देशभक्ति को स्मरण किया गया।
26 जनवरी 1915 को जन्मी रानी गैदिनल्यू एक आध्यात्मिक एवं राजनीतिक नेतृत्वकर्ता थीं, जिन्होंने कम आयु में ही अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष का मार्ग अपनाया। मात्र 13 वर्ष की आयु में उन्होंने हेराका आंदोलन से जुड़कर मणिपुर और आसपास के क्षेत्रों से ब्रिटिश शासन को समाप्त करने के अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके संघर्ष और समर्पण ने उन्हें पूर्वोत्तर भारत की स्वतंत्रता चेतना का प्रतीक बना दिया।
कार्यक्रम के दौरान असम राइफल्स के अधिकारियों एवं जवानों ने पुष्पांजलि अर्पित की। स्थानीय बच्चों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं, जबकि रानी गैदिनल्यू के जीवन और योगदान पर भाषण एवं वाचन प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। उपस्थित लोगों ने उनके जीवन से प्रेरणा लेने और राष्ट्र सेवा के संकल्प को दोहराया।
रानी गैदिनल्यू को वर्ष 1972 में ताम्रपत्र स्वतंत्रता सेनानी सम्मान तथा 1982 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। उनका जीवन साहस, आत्मबल और राष्ट्रप्रेम का अद्वितीय उदाहरण है, जो आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा।
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असम राइफल्स ने 17 फरवरी 2026 को मणिपुर के लुंखाओ पार्ट–I गांव में स्वतंत्रता सेनानी की 33वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में उनके ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष और राष्ट्र सेवा के योगदान को याद किया गया।





















