गुरुचरण विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया
21 फरवरी प्रातः 10:00 बजे गुरुचरण विश्वविद्यालय के भाषा शहीद वेदी के समक्ष अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस अत्यंत श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के हिंदी/बांग्ला विभाग (सम्बंधित विभाग) द्वारा एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर निरंजन राय, कुलसचिव डॉ. विद्युतकांति पाल, शैक्षणिक कुलसचिव डॉ. अभिजीत नाथ, वित्त एवं लेखा अधिकारी डॉ. रणविजय दास, छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. जयदीप पाल तथा विभागाध्यक्ष डॉ. अनामिका चक्रवर्ती सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक-शिक्षिकाएं, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. निरंजन राय सहित अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा भाषा शहीद वेदी पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके पश्चात भौतिकी विभाग के छठे सेमेस्टर के छात्र तुहिन मजूमदार ने ‘आमी बांग्लाय गान गाई’ गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भावनात्मक बना दिया।
स्वागत भाषण में विभागाध्यक्ष डॉ. अनामिका चक्रवर्ती ने दिन के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1952 के 21 फरवरी की घटना केवल पूर्वी पाकिस्तान तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने संपूर्ण विश्व की भावनाओं को आंदोलित किया। इसके नौ वर्ष बाद 19 मई 1961 को बराक उपत्यका में मातृभाषा की रक्षा के लिए हुआ रक्तरंजित आंदोलन इस संघर्ष की एक और महत्वपूर्ण कड़ी बना। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक संघर्ष वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान और जागरूकता के लिए प्रेरित करता रहेगा। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस ने विश्व के प्रत्येक भाषा समुदाय में मातृभाषा के अधिकारबोध को और सशक्त किया है।
अपने संबोधन में कुलपति प्रो. निरंजन राय ने सभी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि शोधों से यह स्पष्ट हुआ है कि जिन देशों में मातृभाषा में शिक्षा दी जाती है, वे आर्थिक रूप से अधिक प्रगति करते हैं। भारत में भी 2020 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत पांचवीं कक्षा तक मातृभाषा में शिक्षा के अधिकार को मान्यता दी गई है, जिससे देश के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अपनी मातृभाषा से प्रेम करते हुए अन्य भाषाओं का ज्ञान अर्जित करना भी आवश्यक है, क्योंकि बहुभाषिकता से राष्ट्रीय एकता और पारस्परिक समझ को मजबूती मिलती है।
कार्यक्रम का समापन भौतिकी विभाग के द्वितीय सेमेस्टर के छात्र स्नेहाशीष दास की संगीतमय प्रस्तुति के साथ हुआ। पूरे आयोजन में मातृभाषा के प्रति सम्मान, गर्व और भावनात्मक जुड़ाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ।




















