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शिलचर में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर बहुभाषिक साहित्यिक समारोह आयोजित

शिलचर, 21 फरवरी : अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार अशोक वर्मा के प्रयास तथा बालार्क प्रकाशन के तत्वावधान में शिलचर के कछाड़ हाईस्कूल रोड स्थित उनके निवास स्थान पर एक गरिमामय साहित्यिक समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का सुंदर संगम देखने को मिला।
समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात शिक्षाविद् एवं साहित्यकार डॉ सन्तोष रंजन चक्रवर्ती ने की। मंच पर प्रमुख रूप से तपोज्योति भट्टाचार्य, सुभाष चंद्र पाल, बाबुल नारायण कानू, दिलीप कुमार, मथुरा सिंह, कुसुम कलिता तथा मानसी सिन्हा सहित अनेक साहित्यप्रेमी एवं बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके पश्चात बालार्क प्रकाशन द्वारा प्रकाशित विशेष भोजपुरी अंक का विधिवत लोकार्पण किया गया, जिसे उपस्थित साहित्यकारों ने मातृभाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
स्वागत एवं प्रासंगिक वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए तपोज्योति भट्टाचार्य ने मातृभाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, पहचान और विरासत की आत्मा होती है।
समारोह की विशेष आकर्षण बहुभाषिक काव्य पाठ रहा, जिसमें विभिन्न भाषा-भाषी कवियों ने अपनी मातृभाषाओं में रचनाएं प्रस्तुत कर कार्यक्रम को साहित्यिक ऊंचाई प्रदान की। कुसुम कलिता ने असमिया, मथुरा सिंह एवं मानसी सिंह ने बिष्णुप्रिया, कमला सोनार ने नेपाली, बन्दना देव, स्वातीलेखा राय एवं चन्दन शुक्लवैद्य ने बांग्ला भाषा में काव्य पाठ किया। वहीं दिलीप कुमार, सर्वेश स्वर्णकार, डॉ रीता सिंह यादव, राजकुमारी मिश्रा, कल्पना सिंह, बिन्दु सिंह तथा सीमा स्वर्णकार सहित अनेक कवियों ने हिन्दी एवं भोजपुरी में अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
अदिति वर्मा ने अशोक वर्मा की भोजपुरी कविता का प्रभावशाली पाठ किया, जबकि राजु वर्मा ने अन्नपूर्णा देवी एवं टीना वर्मा की रचनाओं का वाचन किया। बाबुल नारायण कानू ने डॉ शैलेश पंडित एवं सुरेश चंद्र द्विवेदी की कविताओं के साथ अपनी स्वरचित भोजपुरी कविता भी प्रस्तुत कर श्रोताओं की सराहना प्राप्त की।
अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ सन्तोष रंजन चक्रवर्ती तथा सुभाष चंद्र पाल ने अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए मातृभाषाओं के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया तथा अशोक वर्मा की साहित्यिक सक्रियता और बहुभाषिक समन्वय के प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम के अंत में बाबुल नारायण कानू ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। समारोह का सफल संचालन बिन्दु सिंह ने किया।
यह आयोजन बराक घाटी की बहुभाषिक सांस्कृतिक विरासत एवं साहित्यिक एकता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा, जिसमें विभिन्न भाषाओं के रचनाकारों ने मातृभाषा सम्मान का सामूहिक संदेश दिया।




















