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गुरुचरण विश्वविद्यालय में ‘बैंक नोटों की सुरक्षा विशेषताएँ’ विषय पर कार्यशाला आयोजित
काछार जिले के शैक्षणिक परिवेश में वित्तीय जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय रिज़र्व बैंक की पहल पर “बैंक नोटों की सुरक्षा विशेषताएँ” विषयक एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन आज गुरुचरण विश्वविद्यालय के सभागार में किया गया। कार्यक्रम का आयोजन लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर, काछार, पंजाब नेशनल बैंक तथा विश्वविद्यालय के फाइनेंस क्लब के संयुक्त सहयोग से संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर निरंजन राय, आरबीआई गुवाहाटी शाखा के प्रबंधक अभिषेक सिंह एवं रिया बंसल, एलडीएम नाबार्ड काछार रविशंकर लिकमाबाम, विप्रजीत दत्ता सहित विभिन्न विभागों के प्राध्यापक-प्राध्यापिकाएँ और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में कुलपति प्रो. निरंजन राय ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि बैंकिंग और वित्तीय सुरक्षा के प्रति जागरूकता आज के समय की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि छात्र केवल पाठ्यपुस्तक तक सीमित न रहें, बल्कि व्यवहारिक अनुभव और समसामयिक जानकारी भी प्राप्त करें। इसी उद्देश्य से समय-समय पर जागरूकता और कौशल-आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
आरबीआई की प्रबंधक रिया बंसल ने भारतीय बैंक नोटों में निहित विभिन्न सुरक्षा विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने जाली नोटों की पहचान और रोकथाम के उपायों पर चर्चा करते हुए वॉटरमार्क, सिक्योरिटी थ्रेड, माइक्रो-लेटरिंग, लैटेंट इमेज, रंग बदलने वाली स्याही तथा दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए विशेष चिह्न जैसी महत्वपूर्ण विशेषताओं की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को सरल तरीकों से असली और नकली नोट की पहचान करने के व्यावहारिक सुझाव भी दिए।
आरबीआई के अभिषेक सिंह ने डिजिटल युग में बढ़ते ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराध के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें, अनजान कॉल या संदेश के माध्यम से व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें तथा ओटीपी, पिन और पासवर्ड जैसी गोपनीय सूचनाएँ किसी के साथ साझा न करें।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया। यह कार्यशाला वित्तीय साक्षरता और जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।





















