राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 पर गुरुचरण विश्वविद्यालय में विविध प्रतियोगिताओं का आयोजन
थीम: “महिला एवं विज्ञान – विकसित भारत के निर्माण की प्रेरणा”
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 के अवसर पर गुरुचरण विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग द्वारा इस वर्ष की थीम “महिला एवं विज्ञान – विकसित भारत के निर्माण की प्रेरणा” को केंद्र में रखते हुए विभिन्न प्रतियोगिताओं और कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के अंतर्गत “दैनिक जीवन में महिला एवं विज्ञान” विषय पर फोटोग्राफी प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता का संचालन प्राणीशास्त्र विभाग की सहायक प्राध्यापिका मिस चंद्रमिता बरूआ के मार्गदर्शन में हुआ। निर्णायक के रूप में भौतिकी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. इंदिरा डे उपस्थित रहीं। चित्रों की मौलिकता एवं भाव अभिव्यक्ति के आधार पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान निर्धारित किए गए।
इसी क्रम में “She Leads, She Discovers, She Inspires” विषय पर पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता का आयोजन सहायक प्राध्यापिका मिस नजराना सुल्ताना बेगम के पर्यवेक्षण में हुआ। इस प्रतियोगिता के निर्णायक छात्र कल्याण डीन एवं रसायन विभागाध्यक्ष डॉ. जयदीप पाल थे।
विज्ञान दिवस की प्रातः विश्वविद्यालय के सम्मेलन कक्ष में “Her ‘Science’ Legacy: Discoveries and their Untold Stories” विषय पर मौखिक प्रस्तुति प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें प्राणीशास्त्र विभाग की छह छात्र टीमों ने भाग लिया। निर्णायक मंडल में वनस्पति विज्ञान विभाग की सहयोगी प्राध्यापिका डॉ. दीपा नाथ, छात्र कल्याण डीन एवं रसायन विभाग के सहयोगी प्राध्यापक डॉ. जयदीप पाल तथा प्राणीशास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक विजय ब्रह्म शामिल थे।
द्वितीय सत्र में “Participation of Women in STEM: Challenges and Opportunities” विषय पर आमंत्रित व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह व्याख्यान असम विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग की सहयोगी प्राध्यापिका डॉ. यासमीन चौधरी ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। स्वागत भाषण प्राणीशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. देविप्रीता दत्ता ने दिया। उन्होंने विज्ञान दिवस के महत्व और इस वर्ष की थीम पर प्रकाश डाला।
अकादमिक समन्वयक (विज्ञान) डॉ. नीलेंदु धर ने वास्तविक जीवन में महिलाओं की वैज्ञानिक भूमिका पर चर्चा करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय की छहों विभागाध्यक्ष महिलाएं हैं। विश्वविद्यालय के शैक्षिक निबंधक डॉ. अभिजीत नाथ ने विद्यार्थियों को मैरी क्यूरी, जानकी अम्माल और असीमा चट्टोपाध्याय के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. निरंजन राय ने स्वतंत्रता-पूर्व काल से लेकर वर्तमान समय तक विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने लीलावती से लेकर रसायनविद् असीमा चट्टोपाध्याय, भौतिक विज्ञानी विभा चौधुरी तथा समकालीन महिला वैज्ञानिकों के योगदान को रेखांकित करते हुए ‘विकसित भारत’ के निर्माण में महिलाओं की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने विभिन्न प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों की व्यापक भागीदारी की सराहना भी की।
डॉ. यासमीन चौधरी का परिचय प्राणीशास्त्र विभाग की चतुर्थ सेमेस्टर की छात्रा मिस स्वर्णा देव ने कराया। अपने व्याख्यान में डॉ. चौधरी ने कहा कि भारत में बालिका शिक्षा के क्षेत्र में विद्यालय स्तर पर उल्लेखनीय प्रगति हुई है, किंतु वही अनुपात कार्यक्षेत्र में दिखाई नहीं देता। उन्होंने बताया कि STEM, विज्ञान ज्योति (Vigyan Jyoti), WISE-KIRAN, गती (GATI) तथा SERB-POWER जैसी सरकारी पहलों के माध्यम से विज्ञान में महिलाओं की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है।
उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए छात्र-छात्राओं को अपने सपनों का पीछा करने, संघर्ष से न डरने, आत्मप्रेरणा विकसित करने और अपने रुचि क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने हेतु कठोर परिश्रम करने के लिए प्रेरित किया।
इसके पश्चात पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्राणीशास्त्र विभाग की टीचिंग असिस्टेंट डॉ. पूबाली डे ने किया। धन्यवाद ज्ञापन सहायक प्राध्यापक विजय ब्रह्म ने प्रस्तुत किया, जबकि संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन छठे सेमेस्टर के छात्र प्रतीक भट्टाचार्य ने किया।
राष्ट्रीय गान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।





















