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मदमस्त होली
आया मदमस्त महिना फागुन का
फिज़ा घुला रंग में
आजा साजन खेलेंगे होली संग में…..
यौवन लेने लगी अंगराईयां
मंद हवाएं चलने लगी संग में
आजा प्रियतम खेलेंगे होली संग मे…..
लेकर रिश्ता मेहमान आए
तब अगुवा भींगे रंग में
आजा प्रिय खेलेंगे होली संग में…..
बिन बरसे बादल गरजे घनघोर
रह- रहके बिजुलियां चमके संग में
आजा परदेसी खेलेंगे होली संग में…..
सुहानी हवाएँ बहने लगी
सब भूल गए, जब रहते थे तंग में
भूलकर बैर भाव खेलेंगे होली संग में…..
चारो ओर पावन अठखेलियाँ
लोग दिखने लगे रंग- बिरंग में
बुजुर्गों के चरण में रख गुलाल खेलेंगे होली संग में….
पवन कुमार शर्मा (शिक्षक)





















